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बिहार कांग्रेस का विवाद क्यों हुआ विस्फोटक, 8 सितंबर को दिल्ली कूच करेंगे नाराज नेता, किस पर गिरेगी गाज?

Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): बिहार के बदलते राजनीतिक माहौल में जहां सभी दल अपने संगठन को मजबूत करने में जुटे हुए हैं. बगल के यूपी के विधानसभा चुनाव की तैयारी पार्टियां कर रही हैं, वहीं बिहार कांग्रेस की अंदरूनी कलह और बढ़ गई है. बिहार कांग्रेस के नेताओं ने अपने ही पार्टी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है. धनबाद के एक कांग्रेसी नेता के अनुसार 8 सितंबर को बिहार में बड़ी संख्या में कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता दिल्ली स्थित पार्टी के राष्ट्रीय मुख्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन करेंगें. दरअसल, नाराज कांग्रेस नेताओं के निशाने पर बिहार कांग्रेस के प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष है. दोनों को 2025 के विधानसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के लिए जिम्मेवार बताया जा रहा है. 

कहा जा रहा है कि 2025  के चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन बहुत कमजोर रहा.  कांग्रेस केवल 6 सीटों पर सिमट गई, जबकि 2019 में 19 सीट मिली थी. नाराज कांग्रेस नेताओं का कहना है कि लंबे समय से नेतृत्व से बातचीत का रास्ता खोजा जा रहा है. यह भी आरोप लगाए जे रहे हैं  कि पिछले नवंबर महीने से राहुल गांधी से मिलने की कोशिश की जा रही है, लेकिन हमें समय नहीं दिया जा रहा है. 3 नवंबर को हम लोगों ने मल्लिकार्जुन खड़गे, के सी वेणुगोपाल और अशोक गहलोत से मुलाकात की थी. उन्होंने उन्होंने मांगों पर विचार करने का भरोसा दिया था. लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. दरअसल, बिहार कांग्रेस में विवाद कई महीनो से चल रहा है.

आपको याद होगा कि पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और सांसद अखिलेश सिंह ने कुछ महीने पहले कहा था कि मुझे कुर्सी से हटाने का ही परिणाम है कि कांग्रेस 6 सीटों पर सिमट गई. उल्लेखनीय है कि बिहार विधानसभा के चुनाव में सबसे अधिक दुर्गति कांग्रेस की हुई है. उसके बाद से ही पार्टी में असंतोष लगातार बढ़ रहा है. अब असंतोष विस्फोटक हो गया है. प्रदेश प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष को हटाने की मांग असंतुष्ट कर रहे हैं.

यहां उल्लेखनीय है कि बिहार के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह सार्वजनिक रूप से यह बयान दिया था कि बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्हें प्रदेश अध्यक्ष से हटाए जाने के कारण ही पार्टी का प्रदर्शन खराब रहा. कांग्रेस केवल 6 सीटों पर सिमट गई. उन्होंने दावा किया था कि उनके कार्यकाल में पार्टी ने लोकसभा चुनाव में बेहतर परिणाम दिए थे. उन्होंने बिना नाम लिए बिहार कांग्रेस के प्रभारी और सह प्रभारी की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे. उन्होंने आरोप लगाया था कि जिन लोगों को राजनीति की कोई जानकारी-अनुभव नहीं ही. उन्हें बिहार का प्रभारी बना दिया गया और आते ही उन्होंने सबसे पहले उन्हें पद से हटा दिया. 

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