टीएनपी डेस्क(TNP DESK): कहा जाता है कि धरती का भगवान डॉक्टर ही होता है, जो हमें गंभीर से गंभीर बीमारी से ठीक करता है और दूसरा नया जन्म देता है, लेकिन कभी-कभी इसी धरती पर डॉक्टर से भी अजीबोगरीब लापरवाही हो जाती है, जो समझ से परे होती है. दरअसल, बिहार के सीवान जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां डॉक्टर ने ऐसी लापरवाही की है, जिसे सुनकर माथा चकरा जाएगा और डॉक्टर के पास जाने से भी आपको डर लगेगा. हालांकि सभी डॉक्टर ऐसे नहीं होते हैं, लेकिन एक-दो डॉक्टरों की लापरवाही की वजह से सभी डॉक्टरों की कार्यशैली पर सवाल उठते हैं. बताया जा रहा है कि एक मरीज अपनी दाहिनी पैर के फ्रैक्चर को लेकर अस्पताल पहुंच गया, लेकिन डॉक्टर ने उसके बाएं पैर का ऑपरेशन कर दिया.
दाहिने पैर में था फ्रैक्चर, लेकिन बाएं पैर का कर दिया ऑपरेशन
अब जरा सोचिए, किसी की दाहिनी पैर में फ्रैक्चर हो और बाएं पैर में ऑपरेशन किया जाए, तो मरीज का क्या हाल होगा. एक पैर के दर्द से तो परेशान था ही, ऑपरेशन की वजह से दूसरी पैर में भी दर्द दे दिया. वहां परिजनों की ओर से जब आपत्ति जताई गई, तो फिर से दूसरी पैर में भी ऑपरेशन किया गया.वहीं, इस मामले को लेकर पीड़ित जानकी कुँवर ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष परिषद में शिकायत की है. जब सुनवाई हुई, तो उन्होंने दस्तावेज, एक्स-रे रिपोर्ट, एक्स-रे प्लेट, डिस्चार्ज, लैब जांच रिपोर्ट, कानूनी नोटिस समेत अन्य दस्तावेज आयोग के सामने सबूत के तौर पर पेश किए.शिकायत के अनुसार, जानकी कुँवर की दाहिनी जांघ में फ्रैक्चर हुआ था. वहां एक्स-रे होने के बाद उन्हें संबंधित अस्पताल में भर्ती कराया गया. इलाज के दौरान डॉक्टर ने दाहिनी जांघ का ऑपरेशन कर दिया. वहीं, जब परिजनों को इस लापरवाही की सूचना मिली, तो उन्होंने आपत्ति जताई, जिसके बाद बाईं जांघ का भी ऑपरेशन किया गया.
आयोग ने डॉक्टर को माना दोषी
आपको बता दें कि इस मामले में उपभोक्ता विवाद प्रतितोष परिषद में शिकायत दर्ज कराई गई और चिकित्सालय की लापरवाही के कारण हुई परेशानी की वजह से मुआवजे की मांग की गई. वहीं, मामले की सुनवाई के दौरान विपक्षी पक्ष ने आरोपों से इनकार किया और शिकायत खारिज करने की मांग की, लेकिन आयोग ने साक्ष्यों और दलीलों के आधार पर इसका परीक्षण किया. जिसके आधार पर आयोग ने माना कि मुख्य तथ्य होने के बावजूद गलत पैर का ऑपरेशन हुआ और बाद में सही पैर का भी ऑपरेशन किया गया. आयोग ने इसे सेवा में कमी माना.
पीड़ित मरीज को देना होगा 8 लाख रुपये
वहीं, आयोग की ओर से शिकायतकर्ता जानकी कुँवर के पक्ष में फैसला सुनाते हुए डॉक्टर को 8 लाख का क्षतिपूर्ति के रूप में देने का आदेश दिया गया. वहीं, इसके साथ ही मानसिक और शारीरिक पीड़ा के लिए 20,000 और मुकदमे के खर्च के रूप में 5,000 देने का भी निर्देश दिया गया है. यानी अब डॉक्टर को कुल 8,25,000 का भुगतान करना होगा.
