सहरसा (SAHARSA): जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने सहरसा दौरे के दौरान बिहार सरकार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर कई मुद्दों को लेकर तीखा हमला बोला. उन्होंने कोसी की बाढ़, जल संसाधन विभाग और शराबबंदी की स्थिति पर सवाल उठाते हुए सरकार की नीतियों को कठघरे में खड़ा किया. साथ ही सम्राट चौधरी के कथित ‘बेचारा’ वाले बयान पर भी जवाब दिया.
‘बिहार को सुधारने के संकल्प के सामने कोई चारा नहीं’
प्रशांत किशोर ने सम्राट चौधरी के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि बिहार को बेहतर बनाने के उनके संकल्प के सामने विरोधियों के पास कोई चारा नहीं है. उन्होंने कहा कि बिहार को ऐसे नेताओं के भरोसे छोड़कर पीछे हटना संभव नहीं है. प्रशांत किशोर ने राज्य की मौजूदा समस्याओं के लिए लंबे समय से सत्ता में रहे राजनीतिक नेतृत्व की जवाबदेही तय करने की बात कही.
कोसी की बाढ़ को लेकर सरकार से सवाल
कोसी क्षेत्र में हर साल आने वाली बाढ़ का मुद्दा उठाते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि इसकी वास्तविक पीड़ा वही व्यक्ति समझ सकता है, जिसने प्रभावित गांवों में जाकर लोगों की परिस्थितियों को करीब से देखा हो. उनका दावा है कि कई परिवारों को एक ही वर्ष में दो से तीन बार अपना ठिकाना बदलना पड़ता है. उन्होंने कहा कि कोसी में बाढ़ की समस्या दशकों पुरानी है, लेकिन आज तक इसका स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सका. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार सरकार से सवाल किया कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद लोगों को बाढ़ से स्थायी राहत कब मिलेगी.
बाढ़ से जुड़े कार्यों में भ्रष्टाचार का लगाया आरोप
प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि बाढ़ से निपटने के नाम पर होने वाले विभिन्न सरकारी कार्यों में भ्रष्टाचार की गुंजाइश बनी हुई है. उन्होंने बांध निर्माण, मरम्मत, बाढ़ राहत और बाढ़ के बाद फैलने वाली बीमारियों से जुड़े सरकारी खर्च पर सवाल उठाए. उनका आरोप है कि व्यवस्था से जुड़े कुछ लोगों के हित के कारण समस्या का स्थायी समाधान प्राथमिकता नहीं बन पाता.
जल संसाधन विभाग और शराबबंदी पर भी निशाना
प्रशांत किशोर ने जल संसाधन विभाग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिहार में सरकारें और विभागीय जिम्मेदारियां बदलती रही हैं, लेकिन यह विभाग सत्ता के लिए हमेशा महत्वपूर्ण बना रहा है. शराबबंदी को लेकर उन्होंने दावा किया कि कानून का प्रभाव जमीन पर अपेक्षा के अनुरूप नहीं दिख रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि अवैध शराब के कारोबार से माफिया और व्यवस्था से जुड़े लोगों को फायदा मिल रहा है. साथ ही उन्होंने सूखे नशे के बढ़ते चलन पर चिंता जताते हुए चेतावनी दी कि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो बिहार के सामने गंभीर सामाजिक चुनौती पैदा हो सकती है.
