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Bihar: ऑटो-ई रिक्शा के लिए तय होंगे रूट, कलर और QR कोड से होगी पहचान,जानिए पूरी डिटेल

Rajnish Sinha
Rajnish Sinha
Sr. Copy Editor

Bihar news: बिहार के शहरों में ऑटो और ई-रिक्शा से यात्रा करने वाले लोगों के साथ वाहन चालकों के लिए भी अहम बदलाव की तैयारी है. शहरों में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को नियंत्रित करने के उद्देश्य से परिवहन विभाग ऑटो और ई-रिक्शा का संचालन निर्धारित रूट और जोन के आधार पर कराने की दिशा में काम कर रहा है. नई व्यवस्था को राज्य के सभी 38 जिला मुख्यालयों में लागू करने की योजना है.

हर रूट के लिए होगी अलग पहचान

नई व्यवस्था लागू होने के बाद ऑटो और ई-रिक्शा को तय रूट पर ही चलने की अनुमति मिलेगी. अलग-अलग जोन और रूट की पहचान आसान बनाने के लिए कलर कोड निर्धारित किए जाएंगे. वाहनों पर रूट नंबर भी दर्ज होगा. इससे ट्रैफिक पुलिस और यात्रियों के लिए यह पहचानना आसान होगा कि संबंधित वाहन किस रूट के लिए अधिकृत है.विभाग सड़कों की क्षमता का आकलन करके यह भी तय करेगा कि किसी रूट पर अधिकतम कितने ऑटो या ई-रिक्शा संचालित किए जा सकते हैं.

QR कोड में मिलेगी वाहन की जानकारी

ऑटो और ई-रिक्शा पर QR कोड लगाने की भी योजना है. इसे स्कैन करने पर वाहन, मालिक, चालक और स्वीकृत रूट से जुड़ी जरूरी जानकारी प्राप्त की जा सकेगी. संबंधित थाना और ट्रैफिक कार्यालय की जानकारी भी इसमें शामिल की जा सकती है. इससे नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों की पहचान और निगरानी आसान होगी.

पटना में पहले लागू करने की तैयारी

नई व्यवस्था की शुरुआत पटना से करने की तैयारी है. यहां जोन और रूट निर्धारित किए जा चुके हैं. वाहन मालिकों और चालकों के आवेदन के लिए एक पोर्टल और मोबाइल ऐप शुरू करने की योजना भी है. यदि किसी रूट पर निर्धारित क्षमता से अधिक आवेदन आते हैं तो आवंटन लॉटरी के माध्यम से किया जा सकता है. खुद अपना वाहन चलाने वाले और वैध परमिट रखने वाले आवेदकों को प्राथमिकता देने की योजना है.

जाम और अनावश्यक आवाजाही घटाने पर जोर

पटना के बोरिंग रोड, बेली रोड, अनीसाबाद, फुलवारी, पटना जंक्शन, अशोक राजपथ, जीरो माइल और कंकड़बाग जैसे इलाकों में वाहनों का दबाव अक्सर अधिक रहता है. रूट आधारित व्यवस्था से एक ही क्षेत्र में जरूरत से ज्यादा ऑटो और ई-रिक्शा पहुंचने की समस्या कम हो सकती है. परिवहन विभाग का लक्ष्य इस व्यवस्था के जरिए ट्रैफिक को व्यवस्थित करने के साथ अनावश्यक वाहन संचालन को कम करना है. पटना के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से बिहार के अन्य जिला मुख्यालयों में भी लागू करने की तैयारी है.

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