Bihar

बिहार में चीनी उद्योग को मिलेगा बूस्ट, रैयाम-सकरी में 852 करोड़ की नई मिलों पर तेजी से हो रहा काम

Rajnish Sinha
Rajnish Sinha
Sr. Copy Editor

पटना (PATNA): बिहार में गन्ना किसानों और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रैयाम और सकरी में प्रस्तावित नई सहकारी चीनी मिलों की स्थापना की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है. सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव ने मंगलवार को दोनों परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की और अधिकारियों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवश्यक कार्रवाई पूरी करने का निर्देश दिया.समीक्षा के दौरान विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR), वित्तीय व्यवस्था, किसान सदस्यता, इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL) के साथ प्रस्तावित समझौते और परियोजनाओं के अगले चरणों पर चर्चा हुई.

बंद मिलों की जमीन पर स्थापित होंगी नई इकाइयां 

दरभंगा के रैयाम और मधुबनी के सकरी में बंद पड़ी चीनी मिलों की भूमि पर आधुनिक सहकारी चीनी मिलें स्थापित करने की योजना है. राज्य मंत्रिपरिषद इस संबंध में निर्णय ले चुकी है. इन इकाइयों को केवल चीनी उत्पादन तक सीमित न रखकर एकीकृत कृषि आधारित औद्योगिक मॉडल के रूप में विकसित करने की तैयारी है. IPL के साथ प्रस्तावित MOU का प्रारूप विभागीय मंत्री से अनुमोदित होने के बाद कंपनी की सहमति के लिए भेजा गया है. दोनों मिलों की भूमि को प्रस्तावित रूप से 30 वर्षों की लीज पर IPL को देने की प्रक्रिया पर भी काम चल रहा है. दोनों परियोजनाओं की संयुक्त अनुमानित लागत करीब 852.43 करोड़ रुपये है. इसमें रैयाम चीनी मिल पर लगभग 504.67 करोड़ रुपये और सकरी परियोजना पर करीब 347.76 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. परियोजनाओं से गन्ना उत्पादन, परिवहन, कृषि सेवाओं और स्थानीय रोजगार को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है.

27,980 किसानों ने दिखाई सहकारिता में रूची 

नई मिलों में किसानों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्राथमिक चीनी मिल सहकारी समितियों के गठन की प्रक्रिया चल रही है. रैयाम कमांड एरिया से 12,264 और सकरी क्षेत्र से 15,716 किसानों ने सदस्यता के लिए ऑनलाइन आवेदन किया है. इस प्रकार कुल 27,980 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनका सत्यापन किया जा रहा है.सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को गन्ना आपूर्ति के साथ उन्नत बीज, कृषि आदान, मिट्टी जांच, तकनीकी सहायता और प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है. गांव स्तर पर गन्ना क्षेत्र का आकलन कर उत्पादन क्षेत्र बढ़ाने पर भी काम होगा.इसके अलावा सहकारी बैंकों के माध्यम से संस्थागत ऋण तथा Custom Hiring Centre के जरिए कृषि मशीनरी उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे. सरकार का लक्ष्य इन परियोजनाओं के माध्यम से सहकारिता, कृषि और उद्योग को जोड़ते हुए किसान-केंद्रित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देना है.

 

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