पटना: मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह को जदयू के एमएलसी प्रत्याशी नीरज कुमार का विरोध करना काफी महंगा पड़ रहा है. सबसे पहले जदयू ने उन्हें पत्नी समेत पार्टी से 6 वर्षों के लिए बाहर कर दिया तो दूसरी तरफ विधानसभा अध्यक्ष से उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द करने की अनुशंसा की वहीं उनकी पत्नी की 20 सूत्री की सदस्यता खत्म कर दी गई. अब अनंत सिंह को एक बार फिर से जेल जाना पड़ सकता है. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में 30 अक्टूबर को सुनवाई होनी है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्या आएगा इस पर निर्भर करता है कि अनंत सिंह जेल जाएंगे या बाहर ही रहेंगे.
दुलारचंद हत्या मामले में जमानत को चुनौती
दरअसल बीते 30 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान मोकामा इलाके में जन सुराज प्रत्याशी के समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या का आरोप अनंत सिंह पर लगा है. इस मामले में अनंत सिंह जेल जा भी चुके हैं और जमानत पर बाहर हैं. दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में अनंत सिंह की जमानत को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है जिस पर अब 30 अक्टूबर को सुनवाई होगी. उन्होंने याचिका दायर कर अनंत सिंह की जमानत रद्द करने और अनंत सिंह को दोबारा जेल भेजने की मांग की है. नीरज कुमार को उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट से उनके दादा को न्याय मिलेगा.
राज्य सरकार ने आरोप को बताया है सही
दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने इस मामले में बिहार सरकार को पक्षकार संख्या एक और अनंत सिंह को पक्षकार संख्या दो बनाया है. सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार ने 24 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल किया था. हलफनामे में कहा गया है कि दुलारचंद यादव हत्याकांड की पुलिस जांच में अनंत सिंह और कुछ अन्य आरोपितों के खिलाफ लगाये गये आरोप सही पाये गये हैं. इसमें जांच के दौरान एसडीपीओ और एसपी स्तर पर की गयी निगरानी का भी उल्लेख किया गया है. साथ ही, जनवरी 2026 में अनंत सिंह, मणिकांत ठाकुर और रंजीत राम के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किये जाने की जानकारी दी गयी है.
विधानसभा चुनाव के दौरान का है मामला
अब राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि नीरज कुमार और जदयू से बगावत का अनंत सिंह को कीमत चुकानी पड़ेगी और उन्हें जेल जाना पड़ सकता है. हालांकि यह निर्णय अब सुप्रीम कोर्ट में होगा. बता दें कि विधानसभा चुनाव में अनंत सिंह मोकामा से जदयू के उम्मीदवार थे. चुनाव प्रचार के दौरान उनके काफिला का सामना जन सुराज प्रत्याशी से हो गया था और इस दौरान दोनों पक्षों के बीच झड़प हुई थी. दोनों तरफ से ईंट पत्थर चलाए गए थे और इसी दौरान जन सुराज प्रत्याशी के समर्थक दुलारचंद यादव की संदिग्ध हालत में मौत हो गई थी. मामले में अनंत सिंह पर उनकी हत्या का आरोप लगा था और पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. अनंत सिंह ने जेल में रहते हुए चुनाव में जीत हासिल की थी. चुनाव जीतने के बाद उन्हें पटना कोर्ट ने जमानत दी थी.