Bihar

बिहार का यह वायरल छोटा बच्चा क्यों खींच रहा सबका ध्यान? बाबा शिवानंद तिवारी ने क्या कहा,पढ़िए

Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist

टीएनपी डेस्क : बिहार में छात्रों के जुलूस में शामिल एक आठ  साल का बच्चा वायरल हैं.  उसकी बोली, उसकी जानकारी और उसके सवाल करने के तरीके की मुक्त कंठ से प्रशंसा हो रही है.  पुलिस ने उसे हिरासत में लिया था.  आरोप है कि उसके माता-पिता को थाने में ले जाकर पीटा गया.  उसके बाद यह मामला और अधिक तूल पकड़ लिया है.  वह बच्चा न्याय के लिए अब न्यायालय जाने की तैयारी कर रहा हैं.  लोगों का उसे सपोर्ट भी मिल रहा है.  अब बच्चे  के संबंध में बिहार के कद्दावर  समाजवादी नेता रहे शिवानंद तिवारी ने भी अपना मंतव्य दिया हैं.  शिवानंद तिवारी ने फेसबुक पेज पर उस बच्चे   के बारे में लिखा है.  

उन्होंने क्या प्रतिक्रिया दी है, सबको इसे पढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा है कि पटना में छात्रों के जुलूस में शामिल हुआ आठ साल का एक लड़का आज सबका ध्यान अपनी ओर खींच रहा है.  जिस बेझिझकी और आत्मविश्वास के साथ वह पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहा है, वह चकित करने वाला है.  पुलिस ने उसे छह-सात घंटे तक थाने में बैठाए रखा.  उसे हल्की चोट भी आई है.  अब वह अपने इंसाफ के लिए मानवाधिकार आयोग और पटना हाईकोर्ट तक जाने की बात कर रहा है. झोंपड़ी में रहने वाला यह लड़का, जिसकी माँ घरों में काम करती है, पिता मजदूरी करते हैं, किस बिरादरी से आता है, मैं नहीं जानता। लेकिन उसकी सामाजिक स्थिति देखकर सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि वह किसी पिछड़ी या दलित जाति के परिवार से आता होगा। 

 ऐसे ही बच्चों को अगर ‘गुदड़ी का लाल’ कहा जाए तो शायद यह संबोधन बिल्कुल जायज होगा।  हमारे यहाँ ‘गुदड़ी का लाल’ कहने पर सबसे पहले कर्पूरी ठाकुर जी की याद आती है.  कर्पूरी जी आज़ादी के संघर्ष से निकले.आठ साल का यह बच्चा पटना के युवा आंदोलन में सामने आया.जिस उम्र में जिस तरह का बगावती तेवर और आत्मविश्वास दिखाई दे रहा है, उसका दूसरा उदाहरण सामने लाना मुश्किल है. अगर छात्रों और नौजवानों का आंदोलन नहीं हुआ होता तो आदित्य जैसे लड़के को हम आप कैसे जान पाते! जंतर मंतर के आंदोलन से इरफ़ान सामने आए. आश्चर्य जनक व्यक्तित्व. औपचारिक पढ़ाई लिखाई के मामले में बिल्कुल निपढ़. लेकिन ज्ञान हासिल करने की भूख ने उनको इतना ज्ञानी बना दिया कि उनसे मिलने राहुल गांधी उनके घर गये.

आंदोलन ने ऐसे-ऐसे लोगों को सामने ला दिया है, जिन्हें सामान्य परिस्थितियों में शायद कोई देख भी नहीं पाता।समाज में बदलाव की आकांक्षा और उसकी पहल से चमत्कारिक नतीजे निकलते हैं. कॉकरोच जानता पार्टी  चमत्कार नहीं तो क्या है ! 16 मई 2026 को अमेरिका में दो चार नवजवानों ने इसका गठन किया और मोदी सरकार हिल गईं. कहा जाता था कि मोदी सरकार में इस्तीफा नहीं होता है और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हो गया. यह दो तीन महीने में ही हो  गया.इसी का परिणाम है कि देश भर में जगह जगह स्थिति को बदलने की माँग शुरू हो गई है. 

यहां तक कि स्कूली बच्चे बच्चियाँ मुखर होकर अपनी समस्याओं के खिलाफ बोलने लगीं.संघर्ष पीढ़ी बदल देता है. बिहार में हमने देखा है. जयप्रकाश आंदोलन ने पुरानी पीढ़ी को बदल कर नई पीढ़ी के हाथ में राजनीति का बागडोर सौंप दिया था. बहुत लोग कहते हैं कि उससे क्या हासिल हुआ ? लेकिन कौन कहेगा कि समाज वहीं खड़ा है, जहां चौहत्तर पचहत्तर में खड़ा था! झुग्गी झोपड़ाी में रहने वाला आदित्य नाम के लड़के जैसा लड़का क्या पुराने समाज में पैदा हो सकता था.  बदलाव की आकांक्षा लेकर नई पीढ़ी मैदान में उतर चुकी है. सत्ता हिलने लगी है. आगे आगे देखिए होता है क्या ?

TagsBihar