TNPDESK: बिहार की राजनीति में क्षत्रिय की भागेदारी को लेकर बीच बीच में सवाल उठता है. अब फिर राजपूतों के बड़े नेता आनंद मोहन ने खुलेमंच से सरकार में अपनी भागेदारी को लेकर सवाल उठाया है. साथ ही 2029 में ताकत दिखाने की बात कही है. आनंद मोहन मोतीहारी में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के द्वारा महात्मा गांधी प्रेक्षागृह में आयोजित महाराणा प्रताप सिंह जयंती पखवाड़ा समारोह में शामिल होने पहुंचे थे.
सभा को संबोधित करते हुए आनंद मोहन ने कहा कि इतिहास से लेकर आज तक समाज की हिस्सेदारी लगातार कम होती जा रही है.उन्होंने दावा किया कि बिहार विधानसभा में सबसे अधिक विधायक उनके समाज के हैं, इसके बावजूद मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री का पद नहीं मिल सका. उन्होंने लोगों से एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि अगर समाज उनका साथ दे या कम से कम चुप रहे, तो वर्ष 2029 में परिणाम दिखाई देगा. उन्होंने कहा कि हम हिंदुत्व को बचाने चले तो किनारा हो गए,कभी हमे 8.5 प्रतिशत बताया गया ,कभी 7.75 प्रतिशत अब सर्वे में 3.75 प्रतिशत बताया गया फिर भी बिहार के सियासी में सबसे ज्यादा जी हमारी संख्या है जो प्रमाणित करता है की सर्वे में हमारी संख्या कम दिखाया गया है.
उन्होंने कहा कि अगर एकजुट रहे तो 2029 से पहले राज्य में उप मुख्यमंत्री और केंद्र में मंत्री समाज का होगा. राजपूत को राजनीति से समझने की गलती कुछ लोग कर रहे है. लेकिन उन्हे मालूम नहीं है कि राजपूत से राजनीति है. किसी भी दल के बिना भी राजपूत अपने हक और अधिकार की लड़ाई लड़ सकता है. किसी के झंडे की जरूरत नहीं है. एकजुट रहे तो बिहार से लेकर केंद्र की राजनीति को क्षत्रिय कंट्रोल करेगा.आबादी के बावजूद हमे किनारा किया जा रहा है.