Bihar

बिहार सरकार रखती है बेटियों की सेहत का भी ख्याल, इस योजना के तहत मिलते हैं सैनिटरी नैपकिन के लिए इतने रुपये 

Priyanka Kumari CE
Priyanka Kumari CE
Sr. Content Writer

टीएनपी डेस्क(TNP DESK):बिहार सरकार बेटियों की शिक्षा को लेकर कई तरह की योजनाएं चलाती है, जहां उनके जन्म से लेकर ग्रेजुएशन की पढ़ाई तक आर्थिक मदद दी जाती है. वहीं, उनके स्वास्थ्य को लेकर भी सरकार कई योजनाएं चलाती है, जिसमें मुख्यमंत्री किशोरी स्वास्थ्य कार्यक्रम की सैनिटरी नैपकिन योजना काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है. इस योजना के तहत 12 साल और उससे अधिक उम्र की बच्चियों को मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता बनाए रखने और पीरियड्स से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई जाती है. इसके साथ ही बच्चियों को गंदा कपड़ा मासिक धर्म के दौरान इस्तेमाल न करना पड़े, इसे देखते हुए सरकार की ओर से साल में 300रुपये सेनेटरी नैपकिन खरीदने के लिए दिए जाते हैं. इस योजना को शुरू करने के पीछे सरकार की एक ही मंशा है कि स्कूल में पढ़ने वाली बच्चियों को मासिक धर्म के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो और वे अपने पीरियड्स के दौरान स्वच्छता बनाए रखें. इसके लिए सरकार मदद करती है और पैसे देती है, ताकि वे सैनिटरी नैपकिन खरीद सकें.

पढिए किन बच्चियों को दिया जाता है लाभ

सरकार की ओर से जो नियम लागू किए गए हैं, उसके अनुसार जो बच्चियां स्कूल में पढ़ती हैं और 12 साल से अधिक उम्र की हैं, उन्हें प्रजनन स्वास्थ्य और माहवारी स्वच्छता से जुड़ी जानकारी दी जाती है. वहीं, साल में बच्चियों को सैनिटरी नैपकिन खरीदने के लिए 300 की राशि सरकार उपलब्ध कराती है, जो बच्चियों के खाते में भेजी जाती है. ताकि बीच में कोई भी बिचौलिया इस पैसे में कोई गबन न कर सके और बच्चियों तक यह पैसा सही तरीके से पहुंच सके.आपको बता दें कि सरकार की ओर से योजना को शुरू करने के पीछे एक और अच्छी सोच है. पीरियड्स के दौरान बहुत सारी बच्चियां स्कूल नहीं आती हैं, क्योंकि उन्हें कपड़ा गंदा होने की चिंता रहती है. लेकिन अगर बच्चियां नैपकिन का इस्तेमाल करती हैं, तो उन्हें इन सब परेशानियों से छुटकारा मिल जाता है. इससे बच्चियां पीरियड्स के दौरान भी स्कूल आती हैं और अपनी पढ़ाई-लिखाई नियमित रूप से करती हैं. इसीलिए सरकार ने इस योजना की शुरुआत की है.

पैसों के साथ दिए जाते हैं ये सुविधा

आपको बता दें कि इस योजना के तहत बिहार सरकार केवल बच्चियों को पैसे ही नहीं देती, बल्कि पीरियड्स से जुड़ी हर जानकारी भी उन्हें दी जाती है. साथ ही, नैपकिन का कैसे उपयोग करना है और इस्तेमाल किए गए नैपकिन को कहां फेंकना है, यह भी बताया जाता है.योजना के तहत सरकार हर उस बच्ची के खाते में 300 सालाना भेजती है, जिसकी उम्र 12 साल या उससे अधिक है और वह स्कूल में पढ़ रही है. पैसे को केवल और केवल नैपकिन खरीदने के लिए ही दिया जाता है. बिहार सरकार की ओर से जारी इस योजना के नियमों के मुताबिक, कक्षा 7 से 12 तक पढ़ने वाली छात्राओं के लिए सैनिटरी नैपकिन खरीदने के लिए उनके खाते में पैसे भेजे जाते हैं.

हर साल 300 दिए जाते हैं

आपको बता दें कि यहां पर इस बात को समझना जरूरी है कि 300 पूरे मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना की राशि नहीं है, बल्कि यह केवल और केवल मुख्यमंत्री किशोरी स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत दी जाने वाली वार्षिक सहायता है.अब आपके मन में सवाल उठता होगा कि इस योजना का लाभ बच्चियों को कैसे मिलता है. तो आपको बता दें कि शिक्षा व्यवस्था के माध्यम से इसका क्रियान्वयन किया जाता है, जहां सरकारी स्कूल की छात्राओं को यह राशि उपलब्ध कराई जाती है. वहीं, टीचर्स की ओर से भी बच्चों को पीरियड्स से जुड़ी साफ-सफाई के बारे में बताया जाता है.

खाते में सीधे भीजे जाते हैं पैसे

आपको बता दें कि बिहार सरकार की ओर से डीबीटी वेबसाइट पर इस योजना को नकद श्रेणी में रखा गया है, जिसका मतलब है कि योजना के तहत आर्थिक सहायता का प्रावधान है, न कि केवल स्कूल में नैपकिन बांटने की व्यवस्था. इसका मतलब साफ है कि बच्चों को स्कूल में नैपकिन नहीं दिया जाता, बल्कि उनके लिए पैसे दिए जाते हैं. बच्चों को खुद जाकर नैपकिन खरीदना होता है.आपको बता दें कि इस योजना का लाभ बच्चियों को स्कूल रिकॉर्ड के आधार पर दिया जाता है. बिहार में केवल स्कूल में पढ़ने वाली बच्चियों के पीरियड्स और स्वच्छता का ही ख्याल नहीं रखा जाता, बल्कि जो बच्चियां स्कूल नहीं जाती हैं, उन्हें भी इस योजना का लाभ मिलता है. हालांकि, उन्हें आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से सामाजिक विपणन की व्यवस्था के तहत लाभ दिया जाता है. वहीं, स्कूल जाने वाली बच्चियों को उनकी कक्षाओं के आधार पर शिक्षा विभाग के माध्यम से पैसे मिलते हैं.

बच्चियों के सेहत का ख्याल रखना है मकसद

आपको बता दें कि इस योजना के पीछे सरकार की मंशा केवल इतनी नहीं है कि बच्चियों को नैपकिन खरीदने के लिए आर्थिक मदद दी जाए, बल्कि जागरूकता के लिए भी यह काफी जरूरी है. क्योंकि छोटी बच्चियों को साफ-सफाई आदि का उतना ज्ञान नहीं होता. ऐसे में उन्हें जागरूक किया जाता है कि पीरियड्स के दौरान साफ-सफाई कैसे रखी जाती है.आपको बता दें कि इस योजना के बारे में भी सरकार की मान्यता बहुत साफ है. सरकार चाहती है कि पीरियड्स के दौरान भी बच्चियां स्कूल से दूर न हों. यही वजह है कि इस योजना की शुरुआत की गई है. क्योंकि यह ऐसा टॉपिक है, जिस पर कोई भी बात नहीं करना चाहता. यही वजह है कि बच्चियों को इसके बारे में जानकारी नहीं मिल पाती और उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में सरकार ने खुलकर बच्चियों की मदद करने की सोची है और इस योजना की शुरुआत की है, जो सराहनीय है.

TagsBihar