Bihar

तेजप्रताप यादव की शर्त से बढ़ी RJD की मुश्किल, विधान परिषद चुनाव से पहले बिहार की सियासत में हलचल

Priyanka Kumari CE
Sr. Content Writer
तेजप्रताप यादव की शर्त से बढ़ी RJD की मुश्किल, विधान परिषद चुनाव से पहले बिहार की सियासत में हलचल

पटना(PATNA):बिहार की राजनीति में एक बार फिर सुगबुगाहट तेज हो गई है. वजह अगले महीने होने वाले विधान परिषद चुनाव को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो चुका है.राज्य की 10 सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर महागठबंधन और एनडीए दोनों अपने-अपने समीकरण साधने में जुटे है. सबसे ज्यादा नजर राष्ट्रीय जनता दल और यादव परिवार के अंदर चल रही राजनीतिक गतिविधियों पर टिकी हुई है.बताया जा रहा है कि आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने अपने बड़े बेटे तेजप्रताप यादव को विधान परिषद भेजने का प्रस्ताव दिया है लेकिन इस प्रस्ताव के साथ ही एक नया राजनीतिक मोड़ सामने आ गया है. सूत्रों के मुताबिक तेज प्रताप यादव ने साफ कर दिया है कि यदि वे विधान परिषद जाएंगे तो अपनी पार्टी “जनशक्ति जनता दल” के बैनर तले ही जाएंगे.उनकी इस शर्त ने राजद नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है.

राजद के भीतर बढ़ती असहजता का संकेत

तेज प्रताप यादव पिछले कुछ समय से लगातार अलग राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश करते दिख रहे है. कई मौकों पर वे पार्टी लाइन से हटकर बयान देते रहे है. ऐसे में उनका अपनी पार्टी के नाम पर विधान परिषद जाने की इच्छा जताना, राजद के भीतर बढ़ती असहजता का संकेत माना जा रहा है. राजनीतिक जानकार इसे यादव परिवार के अंदर शक्ति संतुलन की नई लड़ाई के रूप में भी देख रहे है.दूसरी ओर विधान परिषद चुनाव को लेकर भाजपा की रणनीति पर भी सबकी नजर है.पिछले राज्यसभा चुनाव में जिस तरह क्रॉस वोटिंग और राजनीतिक जोड़तोड़ की चर्चाएं हुई थीं, उसी तरह की संभावनाओं को लेकर महागठबंधन सतर्क नजर आ रहा है. अगर चुनाव के दौरान कोई बड़ा राजनीतिक खेल होता है और संख्या बल में बदलाव आता है तो इसका असर सीधे बिहार विधानसभा की राजनीति पर पड़ सकता है.

ऐसी किसी संभावना की आधिकारिक पुष्टि

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विपक्षी गठबंधन के विधायकों में टूट या क्रॉस वोटिंग जैसी स्थिति बनी, तो तेजस्वी यादव के नेता प्रतिपक्ष पद पर भी संकट गहरा सकता है.हालांकि फिलहाल ऐसी किसी संभावना की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर चर्चाएं तेज है.इसी बीच खबर है कि लालू प्रसाद यादव इलाज के सिलसिले में जल्द ही सिंगापुर जाने वाले हैं। माना जा रहा है कि इस दौरान वे अपनी बेटी रोहिणी आचार्य से भी मुलाकात करेंगे और परिवार के भीतर चल रहे राजनीतिक मतभेदों को सुलझाने की कोशिश करेंगे.विधान परिषद चुनाव भले ही संख्या के लिहाज से सीमित हो, लेकिन इस चुनाव ने बिहार की राजनीति में नए समीकरणों और संभावित बदलावों की चर्चा को तेज कर दिया है.आने वाले दिनों में राजद परिवार और विपक्षी राजनीति की दिशा क्या होगी, इस पर सबकी नजर बनी हुई है.