Bihar

आनंद मोहन की रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित, अब सबकी निगाहें अंतिम आदेश पर

Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist
आनंद मोहन की रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित, अब सबकी निगाहें अंतिम आदेश पर

टीएनपी डेस्क:  बिहार के बाहुबली पूर्व सांसद आनंद मोहन के मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. बिहार सरकार के उस निर्णय के खिलाफ यह याचिका दायर की गई थी, जिसमें पूर्व सांसद आनंद मोहन को समय से पहले जेल से  रिहा करने का निर्णय लिया गया थे. यह याचिका गोपालगंज के तत्कालीन डीएम की पत्नी ने दायर की है.  आनंद मोहन 1994 में गोपालगंज के तत्कालीन डीएम की हत्या के मामले में उम्र कैद की सजा काट रहे थे.  बिहार में नीतीश कुमार की सरकार ने कानून में संशोधन कर उम्र कैद की सजा काट रहे आनंद मोहन को रिहा कर दिया था. 

 इस पर मृतक की पत्नी ने  आपत्ति जताते हुए याचिका दायर  की है.  जानकारी के अनुसार कोर्ट ने याचिका कर्ता , बिहार सरकार, आनंद मोहन और राज्य माफी बोर्ड की ओर से पेश वकीलों की दलीलें सुनी।  उसके बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है.   बता दें कि   ट्रायल कोर्ट ने 2007 में  आनंद मोहन को मौत की सजा सुनाई थी.  उसके बाद इस फैसले को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी.  हाई कोर्ट ने 2008 में फांसी की सजा को कठोर उम्र कैद में बदल दी थी.  हाई कोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने भी मुहर  लगाई थी. 

इस मामले में बिहार सरकार के आदेश पर आनंद मोहन को छोड़ा गया. 16 साल कैद की सजा काटने के बाद अप्रैल 2023 को सहरसा जेल से उन्हें रिहा कर दिया गया.  उनकी रिहाई बिहार सरकार द्वारा जेल नियमों में किए गए संशोधन के बाद संभव हो सकी थी.  इस संशोधन में सरकारी कर्मचारी की ड्यूटी पर हत्या के दोषियों की समय पूर्व रिहाई पर लगी रोक हटा दी गई थी.  नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री रहते जेल नियमों में बदलाव किया गया था.  तब बिहार में महागठबंधन की सरकार थी.  

आनंद मोहन के साथ सजा काट रहे कई अन्य  कैदियों को भी रिहाई मिली थी.  दरअसल, गोपालगंज के तत्कालीन डीएम की 1994 में मुजफ्फरपुर जिले के खबरा गांव में भीड़ ने पीट-पीट कर हत्या कर दी थी.  एक दिन पहले छोटन शुक्ला की हत्या की गई थी.  गैंगस्टर छोटन शुक्ला की अंतिम संस्कार के पहले शव  यात्रा निकाली जा रही थी.  तभी पटना से गोपालगंज लौट रहे तत्कालीन डीएम पहुंच गए.  आक्रोशित भीड़ में उन्हें गाड़ी से खींच कर मार दिया।  आनंद मोहन इस जुलूस का नेतृत्व कर रहे थे.  उन  पर हत्या के लिए उकसाने का आरोप लगा.