TNP DESK- बिहार की राजनीति में हर दल जल्दबाजी में है. चादर और पांव फैलाने की चर्चा खूब सुनी जा रही है. जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा के एक ट्वीट के बाद बिहार का राजनीतिक तापमान बढ़ गया है. उनके इस बयान को उपेंद्र कुशवाहा के हाल के बयान से जोड़कर देखा जा रहा है. हालांकि ट्वीट में उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया है. ट्वीट में उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा है कि गाँवों में बड़े बुजुर्ग हमेशा सलाह देते हैं, “चादर जितनी हो, पाँव उतने ही फैलाने चाहिए।” लेकिन कुछ अतिमहत्वाकांक्षी लोगों की आदत होती है कि खाली बैठे-बैठे ख्याली पुलाव पकाने और कभी पूरे न होने वाले दिवास्वप्न देखने की. ऐसे महानुभावों को हमारा विनम्र सलाह है कि जदयू की चिंता छोड़कर पहले अपने कुनबे की चिंता करें, क्योंकि आपका कुनबा तो पंचर वाहन की तरह समय समय पर अपना संतुलन खोता रहता है.
बहरहाल,असल बेचैनी की वजह कुछ और है. बिहार के भविष्य, लोकप्रिय एवं जनप्रिय नेता श्री निशांत जी की लगातार बढ़ती लोकप्रियता और जनस्वीकार्यता कुछ लोगों को हजम नहीं हो रही है. ऐसे लोगों को अपना राजनीतिक पाचन तंत्र मजबूत कर लेना चाहिए, भविष्य में काम आएगा। दरअसल, कुछ दिन पहले एक कार्यक्रम में उपेंद्र कुशवाहा ने कहा था कि नीतीश जी के फुर्सत लेने के बाद बिहार और देश भर के लोग इस बात को लेकर चिंतित है कि उनकी विरासत को अब आगे कैसे बढ़ाया जाएगा? कई लोग उनके विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी लेने का दावा करेंगें। हम भी उस पर दावा करते हैं, इसमें कितना सफल होंगे, नहीं जानते। लेकिन बिहार का एक बड़ा तबका चाहता है कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा यह काम करें। दूसरे लोग भी प्रयास कर सकते है. इसमें कोई बुराई नहीं है.
दरअसल, नीतीश कुमार आगे क्या करेंगे, इसको लेकर अभी बहुत कुछ साफ नहीं है. यह अलग बात है कि राज्यसभा में जाकर वह बिहार के राजनीति से लगभग कट गए है. लेकिन अक्टूबर महीने में नीतीश कुमार फिर से बिहार के 38 जिलों में यात्रा निकाल सकते है. नीतीश कुमार के इस कदम को कई एंगल से देखा जा रहा है. इधर , उपेंद्र कुशवाहा ने एक अलग राग शुरू कर दिया है. उपेंद्र कुशवाहा के इस बयान के बाद जदयू के प्रदेश अध्यक्ष ने इस बात को खारिज किया है और कहा है कि उपेंद्र कुशवाहा अपनी पार्टी की चिंता करें ,जदयू की चिंता करने की उनको कोई जरूरत नहीं है. दरअसल, बिहार में अभी नए ढंग की राजनीति शुरू हुई है. इसमें सभी दल शामिल हैं. भाजपा हो, जदयू हो, राजद हो, जीतन राम मांझी की पार्टी हो, उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी हो, चिराग पासवान की पार्टी हो अथवा प्रशांत किशोर की पार्टी हो. सब नए ढंग से राजनीति की शुरुआत की है.
यह सब शुरुआत बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की जीत के बाद शुरू हुई है. बिहार का हर नेता अपने समर्थकों को गोलबंद करने की कोशिश कर रहा है. बिहार में आरक्षण का मुद्दा भी जोर पकड़ सकता है. उपेंद्र कुशवाहा ने कहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने बिहार में आरक्षण का दायरा बढ़ाकर 65% करने का निर्णय लिया था , लेकिन लागू नहीं हो सका. हमारी पार्टी इस आरक्षण सीमा को लागू कराने के लिए काम करेगी। उन्होंने बिहार सरकार से मांग की है कि राज्य में शिक्षा आयोग का गठन किया जाए. रविवार को उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार की विचारधारा की विरासत को आगे बढ़ाने की चिंता मुझे भी करनी चाहिए। मैं भी जदयू को सिंचने का काम किया था. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार और मेरे बेटे दीपक प्रकाश में मेरे लिए कोई अंतर नहीं हैं. दोनों इस देश के भविष्य हैं. निशांत कुमार मेरे बेटे के समान है. बिहार के नालंदा जिले के राजगीर स्थित कन्वेंशन सेंटर में राष्ट्रीय लोक मोर्चा का तीन दिवसीय बीमार शिविर आयोजित किया गया था.
