☰
Bihar

मीसा भारती की FIR मांग से गरमाई बिहार की सियासत, श्रवण कुमार बोले- ‘अपराध की कोई जाति-धर्म नहीं’

Rajnish Sinha
Rajnish Sinha
Sr. Copy Editor

पटना(PATNA): राष्ट्रीय जनता दल की सांसद मीसा भारती के सचिवालय थाना पहुंचने और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग के बाद बिहार की राजनीति गरमा गई है. मीसा भारती ने जमुई की नाबालिग पीड़िता की पहचान कथित रूप से उजागर किए जाने को लेकर मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी. इस मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े एक कर्मचारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने की खबर भी सामने आई है.

मामले को लेकर बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि कौन कहां गया था. हालांकि उन्होंने सरकार की कानून-व्यवस्था का बचाव करते हुए कहा कि सरकार का इकबाल कायम है और अपराध करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा रही है.

अपराध की कोई जाति या धर्म नहीं: श्रवण कुमार

बिहार में अपराध और अपराधियों को लेकर जारी राजनीतिक बयानबाजी पर भी श्रवण कुमार ने प्रतिक्रिया दी. उनसे सवाल किया गया कि अपराध अपराधी कर रहे हैं, लेकिन राजनीतिक दल उसमें जाति देख रहे हैं. इस पर मंत्री ने कहा कि उनकी सरकार अपराध के मामलों को जाति या धर्म के नजरिए से नहीं देखती.श्रवण कुमार के मुताबिक, अपराध करने वाले व्यक्ति की जाति या धर्म के आधार पर कार्रवाई तय नहीं की जा सकती. सरकार की प्राथमिकता अपराध के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करना है. उन्होंने कहा कि जो भी अपराध करेगा, उसके खिलाफ बिना किसी जातीय या धार्मिक भेदभाव के कार्रवाई की जाएगी.

चुनाव आयोग विवाद पर भी बोले मंत्री

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर जारी राजनीतिक विवाद पर भी श्रवण कुमार ने अपनी बात रखी. हाल के दिनों में चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं, जबकि चुनाव आयोग ने अपनी कार्यप्रणाली पर स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा है कि अलग-अलग राय संस्थागत प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है.श्रवण कुमार ने विपक्ष के आरोपों पर कहा कि जब उनकी पार्टी या सहयोगी दल चुनाव जीतते हैं तो चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए जाते हैं, जबकि कांग्रेस या उसके सहयोगी दलों की जीत होने पर ऐसी आपत्तियां नहीं दिखाई देतीं.

उन्होंने साथ ही कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है. यदि आयोग को लगता है कि किसी मामले में विचार या कार्रवाई की आवश्यकता है तो वह उस पर अमल कर सकता है. उनके मुताबिक इस संबंध में अंतिम निर्णय चुनाव आयोग को ही लेना है.

TagsBihar