पटना (PATNA) : बिहार के विभिन्न नगर निकायों में सफाईकर्मियों की हड़ताल का असर अब साफ तौर पर दिखाई देने लगा है. राजधानी पटना समेत दरभंगा, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय और मधुबनी जैसे कई प्रमुख शहरों में कचरा उठाव पूरी तरह ठप हो गया है. इसके कारण सड़कों, गलियों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर कचरे के ढेर लग गए हैं. गंदगी बढ़ने से आम लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है और संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ गया है.
राजधानी पटना की है सबसे खराब स्थिति
सबसे खराब स्थिति राजधानी पटना की है. सफाईकर्मियों के काम बंद करने के बाद शहर के अधिकांश इलाकों में कई दिनों से कचरा जमा है. जगह-जगह फैले कचरे से बदबू फैल रही है, जिससे लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द सफाई शुरू नहीं हुई तो डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है.
गोविंद मित्रा रोड की स्थिति चिंताजनक
पटना के गोविंद मित्रा रोड की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है. यह इलाका पूरे बिहार का सबसे बड़ा दवा बाजार माना जाता है. यहां भी कचरे का अंबार लगा हुआ है, जिससे व्यापारियों, ग्राहकों और मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में गंदगी फैलने से लोगों में चिंता और नाराजगी दोनों बढ़ रही हैं.
हड़ताल के चलते नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं. नागरिकों का कहना है कि प्रशासन और नगर निगम को सफाईकर्मियों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्द समाधान निकालना चाहिए.जब तक हड़ताल खत्म नहीं होती तब तक शहरों में सफाई व्यवस्था सामान्य होना मुश्किल दिखाई दे रहा है.
शहरों को गंदगी से राहत मिल सके
फिलहाल बिहार के कई शहर कचरा संकट से जूझ रहे हैं. लोग प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप कर सफाई व्यवस्था बहाल करने की मांग कर रहे हैं ताकि शहरों को गंदगी से राहत मिल सके और संभावित बीमारियों के खतरे को रोका जा सके.
