Bihar

जब पिया भए कोतवाल....ना खेला मैच, ना जीता मेडल,फिर भी मिला नौकरी का लाभ, बिहार के इस खिलाड़ी पर उठे सवाल

Priyanka Kumari CE
Priyanka Kumari CE
Sr. Content Writer

पटना (PATNA):एक कहावत है, ‘जब पिया भए कोतवाल, तो डर काहे का’. यह कहावत बिहार में सच साबित होती दिखाई दे रही है. तभी तो बिहार सरकार की ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना का फायदा ऐसे लोग भी उठाते नजर आ रहे हैं, जिन्होंने आज तक एक मैच तक नहीं खेला. दरअसल बिहार में खेल कोटे से नौकरी और खेल सम्मान योजनाओं में फर्जीवाड़े का एक बड़ा मामला सामने आया है. जहां बिहार राज्य खेल प्राधिकरण (BSSA) की जांच में आरोप सामने आया है कि 2019 की सीनियर महिला राष्ट्रीय रग्बी-7 चैंपियनशिप में वास्तविक रूप से हिस्सा नहीं लेने के बावजूद वंदना कुमारी ने खुद को बिहार टीम का सदस्य बताकर सरकारी योजनाओं का लाभ लिया. मामले को गंभीर मानते हुए बीएसएसए ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की अनुशंसा की है.

 रग्बी खिलाड़ी पर उठे सवाल

जांच रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2019 में पटना में आयोजित सीनियर महिला राष्ट्रीय रग्बी-7 चैंपियनशिप में वंदना कुमारी का नाम बिहार टीम के आधिकारिक रजिस्ट्रेशन में दर्ज था. हालांकि, उपलब्ध रिकॉर्ड, वीडियो और तस्वीरों की जांच के आधार पर यह पाया गया कि उन्होंने प्रतियोगिता के किसी भी मैच में हिस्सा नहीं लिया था. इसके बावजूद उन्होंने इसी खेल उपलब्धि के आधार पर वर्ष 2021 में खेल सम्मान योजना के तहत 33 हजार रुपये का नकद पुरस्कार प्राप्त किया.

 33 हजार का इनाम और नौकरी का लाभ

मामला सिर्फ नकद पुरस्कार तक सीमित नहीं रहा. वंदना कुमारी पहले से ही भवन निर्माण विभाग में लोअर डिवीजन क्लर्क (LDC) के पद पर कार्यरत थीं. बाद में उन्होंने ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना के तहत अपनी खेल उपलब्धियों का हवाला देते हुए खेल कोटे से पदोन्नति और बेहतर नौकरी का लाभ लेने का दावा किया. आरोप है कि इस प्रक्रिया में भी उन्होंने ऐसी खेल उपलब्धियों का सहारा लिया, जिनकी वास्तविकता पर बीएसएसए की जांच में सवाल उठे हैं.जांच के दौरान यह भी सामने आया कि वंदना कुमारी के पति पंकज ज्योति बिहार रग्बी एसोसिएशन के सचिव हैं. ऐसे में टीम चयन और खेल प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. बीएसएसए ने प्रथम दृष्टया पूरे मामले को प्रतिरूपण (Impersonation) और अनुचित लाभ प्राप्त करने से जुड़ा मामला माना है. प्राधिकरण ने पटना के एसएसपी को पत्र भेजकर वंदना कुमारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अनुशंसा की है.

विभागीय जांच शुरू करने की सिफारिश

बीएसएसए ने भवन निर्माण विभाग को भी पत्र भेजकर मामले में विभागीय जांच शुरू करने की सिफारिश की है. साथ ही, यदि जांच में अनियमितता साबित होती है तो कथित तौर पर अनुचित तरीके से प्राप्त लाभ की वसूली करने की भी सिफारिश की गई है. बीएसएसए का कहना है कि खेल योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखना और वास्तविक खिलाड़ियों के अधिकारों की रक्षा करना जरूरी है. ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई आवश्यक है.यह मामला बिहार में खेल कोटे के तहत होने वाली नियुक्तियों, पदोन्नति और खेल संघों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है. हालांकि, अंतिम रूप से आरोपों की पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी. अगर आरोप सही साबित होते हैं तो इसका असर न केवल खेल व्यवस्था की विश्वसनीयता पर पड़ेगा, बल्कि भविष्य में खेल प्रमाणपत्रों और खिलाड़ियों की उपलब्धियों के सत्यापन की प्रक्रिया को और अधिक कड़ा करने की जरूरत भी सामने आएगी.

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