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बिहार में बदलेगा बालू घाटों की बंदोबस्ती का तरीका, ई-नीलामी से होगा आवंटन,जानिए पूरी डिटेल

Rajnish Sinha
Rajnish Sinha
Sr. Copy Editor

पटना (PATNA): बिहार में बालू घाटों की बंदोबस्ती की प्रक्रिया अब ज्यादा डिजिटल और पारदर्शी होने जा रही है. खान एवं भू-तत्व विभाग की संशोधित व्यवस्था के तहत बालू घाटों का आवंटन ई-टेंडरिंग सह ई-नीलामी के माध्यम से किया जाएगा. तकनीकी जांच में योग्य पाए गए व्यक्ति, फर्म, कंपनी, समिति या ज्वाइंट वेंचर ही ऑनलाइन नीलामी में हिस्सा ले सकेंगे. इनमें सबसे अधिक बोली लगाने वाले को सफल निविदादाता घोषित किया जाएगा.

अंतिम पांच मिनट में बोली आई तो बढ़ेगा समय

ई-नीलामी में अंतिम समय की बोलियों के लिए खास व्यवस्था की गई है. नीलामी खत्म होने से पांच मिनट पहले नई बोली आने पर सिस्टम नीलामी की अवधि स्वतः बढ़ा देगा. नियमों के अनुसार यह अवधि अधिकतम एक घंटे तक बढ़ सकती है. नीलामी के दौरान बोलीदाताओं की पहचान भी गोपनीय रखी जाएगी.

पांच साल के लिए मिलेगा बालू घाट

सफल बोलीदाता को बालू घाट की बंदोबस्ती पांच वर्षों के लिए मिलेगी. पहले वर्ष की राशि ई-नीलामी में लगाई गई सफल बोली के आधार पर तय होगी. इसके बाद दूसरे वर्ष की बंदोबस्ती राशि पिछले वर्ष की राशि का 120 प्रतिशत होगी. आगे भी निर्धारित नियमों के अनुसार राशि में बदलाव किया जाएगा. सफल बोलीदाता को नीलामी के पांच दिनों के भीतर नीलामी राशि का 25 प्रतिशत प्रतिभूति के रूप में जमा करना होगा. भुगतान निर्धारित बैंक खाते से ही स्वीकार किया जाएगा.

अनुमति मिलने के बाद ही शुरू होगा खनन

ई-नीलामी जीतने के तुरंत बाद बालू खनन शुरू नहीं किया जा सकेगा. इसके लिए स्वीकृत खनन योजना, पर्यावरणीय मंजूरी और जल एवं वायु प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी जरूरी सहमतियां समेत सभी वैधानिक स्वीकृतियां प्राप्त करनी होंगी. नदी तल की सुरक्षा के लिए खनन की गहराई भी निर्धारित की गई है. सामान्य तौर पर बिना खुदाई वाले नदी तल से अधिकतम तीन मीटर या जलस्तर, दोनों में जो कम हो, वहीं तक खनन की अनुमति होगी. जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट में अलग सीमा होने पर उसका पालन करना होगा.

बिक्री से परिवहन तक ऑनलाइन निगरानी

बालू की बिक्री और परिवहन को भी डिजिटल निगरानी के दायरे में रखा जाएगा. बंदोबस्तधारी को विभागीय पोर्टल या मोबाइल ऐप पर प्रतिदिन खनन और भंडारण का रिकॉर्ड अपडेट करना होगा. परिवहन और बिक्री के लिए ई-चालान व्यवस्था लागू रहेगी.
नियमों का उल्लंघन होने पर जुर्माने के साथ ई-चालान सुविधा रोकी जा सकती है. घाट पर निर्धारित साइन बोर्ड नहीं लगाने पर एक लाख रुपये तक और भू-निर्देशांक के अनुसार सीमा स्तंभ नहीं लगाने पर पांच लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है.
नई व्यवस्था का जोर बालू घाटों की बंदोबस्ती से लेकर खनन, बिक्री, भंडारण और परिवहन तक प्रत्येक चरण का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने पर है. इससे विभाग के लिए गतिविधियों की निगरानी करना और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई करना आसान होगा.

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