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बिहार में कैदियों के परिजनों को बड़ी राहत, अब घर बैठे कर सकेंगे वीडियो कॉल पर मुलाकात,कैसे पढ़ें 

Priyanka Kumari CE
Priyanka Kumari CE
Sr. Content Writer

टीएनपी डेस्क (TNP DESK):कभी-कभी जाने या अनजाने में हुई गलती की वजह से लोग किसी केस में फंस जाते हैं और उन्हें जेल जाना पड़ता है. ऐसे में उनसे ज्यादा उनके अपनों को उनकी चिंता सताती है. लोग समय-समय पर जेल जाकर उनका हाल-चाल जानते हैं और खाने-पीने की कुछ चीजें भी पहुंचाते हैं. लेकिन अब बिहार सरकार ने जेल में बंद कैदियों के परिजनों को बड़ी राहत दी है. अब मिलने की प्रक्रिया को और आसान कर दिया गया है इसे पहले से ज्यादा तकनीक आधारित बनाया गया है. बिहार सरकार ने इस मुलाकात व्यवस्था को फिर से प्रभावी करते हुए नए तरीके से लागू करना शुरू कर दिया है. अब परिजन घर बैठे वीडियो कॉल के जरिए कैदियों से बात कर सकेंगे.

ऑनलाइन स्लॉट बुक करके हो सकती है बात

आपको बता दें कि अब इस नई व्यवस्था के तहत जेल में बंद कैदियों के परिजन, वकील और डॉक्टर ऑनलाइन स्लॉट बुक कर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से घर बैठे बात कर सकते हैं. इससे एक तरफ परिजनों को आने-जाने की परेशानी से राहत मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ उनका खर्च भी कम होगा. इसके साथ ही जेलों में भीड़ भी कम होगी. इस व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी और परिजनों को भी काफी सुविधा मिलेगी. इसकी शुरुआत सबसे पहले मुजफ्फरपुर स्थित शहीद खुदीराम बोस केंद्रीय कारा से की गई है. गृह विभाग के निर्देश पर जेल प्रशासन ने मुलाकात की इस नई व्यवस्था को दोबारा शुरू किया है. यदि सब कुछ सही रहा तो आगे राज्य की अन्य जेलों में भी इस व्यवस्था का विस्तार किया जाएगा.

दो तरीके से परिवार कर सकते है मुलाक़ात

जेल प्रशासन की ओर से कैदियों के परिजनों के लिए मुलाकात के दो माध्यम उपलब्ध कराए गए हैं. पहला राष्ट्रीय ई-प्रिजन (e-Prisons) पोर्टल के माध्यम से, जहां आवेदक को बंदी का पूरा विवरण भरकर ऑनलाइन आवेदन करना होगा. दूसरा विकल्प नागरिक सेवा पोर्टल का है, जिसमें संबंधित व्यक्ति को पहले अपना मोबाइल नंबर जेल प्रशासन से सत्यापित कराना होगा. इसके बाद ओटीपी के माध्यम से ऑनलाइन स्लॉट बुक किया जा सकेगा.

फालतू के खर्च और आने जाने की परेशानी से मिलेगी निजात

नई व्यवस्था के तहत आवेदक अपनी जरूरत के अनुसार दो विकल्प चुन सकते हैं. पहला, जेल परिसर में जाकर पहले की तरह पारंपरिक तरीके से मुलाकात करना. दूसरा, ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से घर बैठे आराम से बात करना. इसका सबसे ज्यादा फायदा दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले परिजनों को मिलेगा, क्योंकि उनका आने-जाने का खर्च कम होगा और यात्रा की परेशानी भी दूर होगी.

कोरोना काल में सबसे पहले की गई थी शुरूआत

इस नई व्यवस्था के तहत आवेदन करते समय आवेदक को अपना पहचान पत्र, फोटो और साथ आने वाले परिजनों का विवरण अपलोड करना जरूरी होगा. आवेदन स्वीकृत होने के बाद ही मुलाकात का समय निर्धारित किया जाएगा. सबसे जरूरी बात यह है कि सप्ताह में केवल एक बार ही जेल में बंद परिजनों से मुलाकात की सुविधा मिलेगी.आपको बता दें कि कोरोना महामारी के दौरान डिजिटल मुलाकात की शुरुआत हुई थी, लेकिन बाद में इसे बंद कर दिया गया था. अब एक बार फिर इसे सुरक्षित और आधुनिक तकनीक के साथ दोबारा शुरू किया गया है.

पढ़े जेल प्रशासन ने लोगों से क्या अपील की है

जेल प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि पंजीकरण के लिए किसी साइबर कैफे या किसी दूसरे व्यक्ति के मोबाइल का इस्तेमाल न करें, बल्कि अपने ही मोबाइल से आवेदन करें, ताकि ओटीपी वेरिफिकेशन और अनुमति की प्रक्रिया में किसी तरह की दिक्कत न आए और मुलाकात सुनिश्चित हो सके.बिहार की कई केंद्रीय और मंडल काराओं में हर दिन बड़ी संख्या में लोग बंदियों से मिलने पहुंचते हैं, जिससे जेलों में भीड़ और लंबी कतारें लग जाती हैं. इससे एक तरफ सुरक्षा जांच और समय की समस्या बनी रहती है, वहीं दूसरी तरफ ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू होने से इन परेशानियों में काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है.

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