पटना (PATNA): बिहार विधान परिषद में सोमवार को बड़ा बदलाव हुआ. सभापति अवधेश नारायण सिंह के पद से इस्तीफा देने के बाद जदयू कोटे से विधान पार्षद रामवचन राय ने सभापति की जिम्मेदारी संभाल ली. रिपोर्टों के मुताबिक, अवधेश नारायण सिंह बीजेपी कोटे से इस पद पर थे और उनके इस्तीफे के बाद एनडीए के भीतर तय व्यवस्था के तहत यह पद जदयू के खाते में गया है. इस बदलाव के साथ बिहार विधान परिषद की शीर्ष संवैधानिक जिम्मेदारी में भी बदलाव हुआ है.
दरअसल, अवधेश नारायण सिंह ने सोमवार को ही अपने पद से इस्तीफा दिया. इसके बाद रामवचन राय ने परिषद के सभापति के रूप में प्रभार ग्रहण किया. इससे पहले रामवचन राय विधान परिषद के उपसभापति पद पर थे. बिहार विधान परिषद की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध रिकॉर्ड में भी रामवचन राय को उपसभापति के रूप में दर्ज किया गया है. सभापति पद में यह बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब बिहार में सत्ता के प्रमुख पदों को लेकर एनडीए के भीतर जिम्मेदारियों के बंटवारे की चर्चा चल रही है. उपलब्ध रिपोर्टों में बताया गया है कि मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष का पद बीजेपी के पास होने के बाद विधान परिषद सभापति का पद जदयू को देने की व्यवस्था बनी.
इस बदलाव को एनडीए के भीतर पदों के संतुलन से जोड़कर देखा जा रहा है. बिहार विधान परिषद में बीजेपी और जदयू दोनों महत्वपूर्ण घटक हैं और सदन में दोनों दलों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व है. आधिकारिक परिषद रिकॉर्ड के अनुसार सदन में बीजेपी के 25 और जदयू के 20 सदस्य हैं. ऐसे में सभापति पद का जदयू के पास जाना गठबंधन के बीच जिम्मेदारियों के बंटवारे का हिस्सा माना जा रहा है. अब रामवचन राय के सामने परिषद की कार्यवाही को संचालित करने और सदन की संवैधानिक जिम्मेदारियों को निभाने की भूमिका होगी.
