Bihar

पटना में JDU का अहम कार्यक्रम आज, UCC से लेकर पार्टी के नाम और फरक्का मुद्दे तक सियासी हलचल तेज

Rajnish Sinha
Rajnish Sinha
Sr. Copy Editor

पटना(PATNA): बिहार की राजधानी पटना में जनता दल यूनाइटेड के जनप्रतिनिधियों के लिए एक दिवसीय विशेष प्रबोधन एवं ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है. पार्टी के विधायकों, विधान परिषद सदस्यों और सांसदों को कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बुलाया गया है. जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे. पार्टी की ओर से बताया गया है कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जनप्रतिनिधियों को विधायी प्रक्रिया, सदन में उनकी जिम्मेदारियों और अपने क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने के बारे में जानकारी देना है. कार्यक्रम में कानून बनाने की प्रक्रिया, विधायी समितियों, राज्य के बजट तथा बिहार की अर्थव्यवस्था जैसे विषयों पर भी चर्चा प्रस्तावित है.

UCC को लेकर जेडीयू पर टिकी नजर

यह कार्यक्रम ऐसे समय हो रहा है जब समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर बिहार की राजनीति में लगातार चर्चा चल रही है. जेडीयू का कहना है कि UCC का मसौदा सामने आने के बाद उसके प्रावधानों का अध्ययन किया जाएगा और उसके आधार पर पार्टी अपना रुख तय करेगी. ऐसे में कार्यक्रम के दौरान नेताओं के बीच UCC को लेकर अनौपचारिक राजनीतिक चर्चा होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा. हालांकि पार्टी की ओर से इसे UCC पर अंतिम निर्णय लेने वाली औपचारिक बैठक नहीं बताया गया है.

पार्टी के नाम में बदलाव की चर्चा

हाल के दिनों में जेडीयू का नाम बदलकर नीतीश कुमार के नाम से जोड़ने का प्रस्ताव भी राजनीतिक चर्चा में आया है. पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने इस विचार का समर्थन किया है. हालांकि नाम बदलने जैसा औपचारिक फैसला पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी और राष्ट्रीय परिषद जैसे उपयुक्त मंच पर ही किए जाने की बात सामने आई है.

फरक्का जल समझौता भी बना बड़ा मुद्दा

फरक्का बैराज और भारत-बांग्लादेश गंगा जल समझौते को लेकर भी जेडीयू सक्रिय है. पार्टी बिहार में गंगा की गाद, बाढ़ और जल प्रवाह से जुड़े सवालों को प्रमुखता से उठा रही है. इसके लिए 'नीतीश संवाद' जैसे कार्यक्रमों के जरिए विभिन्न जिलों में अभियान चलाया जा रहा है. ऐसे राजनीतिक माहौल में पटना में हो रहे जेडीयू के इस कार्यक्रम पर नजरें बनी हुई हैं. हालांकि पार्टी ने स्पष्ट किया है कि इसका घोषित एजेंडा जनप्रतिनिधियों का प्रशिक्षण और विधायी कामकाज की जानकारी देना है, न कि किसी बड़े राजनीतिक या संगठनात्मक फैसले की घोषणा करना.

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