Bihar

बिहार विधानसभा में पत्रकारों की हड़ताल, पास रद्द होने पर कवरेज का बहिष्कार, CM से हस्तक्षेप की अपील

Rajnish Sinha
Sr. Copy Editor
बिहार विधानसभा में पत्रकारों की हड़ताल, पास रद्द होने पर कवरेज का बहिष्कार, CM से हस्तक्षेप की अपील

पटना (PATNA) : बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को पत्रकारों ने अपने दो साथियों के प्रेस पास रद्द किए जाने के विरोध में हड़ताल शुरू कर दी. इस विरोध के चलते विधानसभा की कार्यवाही से जुड़ी सभी तरह की मीडिया कवरेज का बहिष्कार किया गया. पत्रकारों ने साफ कहा कि जब तक दोनों पत्रकारों के पास बहाल नहीं किए जाते तब तक वे विधानसभा की किसी भी गतिविधि की रिपोर्टिंग नहीं करेंगे.

पोर्टिको के बाहर बड़ी संख्या में पत्रकार एकत्र हुए

विरोध प्रदर्शन के दौरान विधानसभा के पोर्टिको के बाहर बड़ी संख्या में पत्रकार एकत्र हुए. उन्होंने अपने कैमरे, माइक और अन्य उपकरण जमीन पर रखकर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताया. इस अनोखे प्रदर्शन के जरिए पत्रकारों ने यह संदेश देने की कोशिश की कि प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकारों के अधिकारों से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा.

बिना उचित कारण दो पत्रकारों के पास रद्द मामला

पत्रकारों का कहना है कि बिना उचित कारण दो पत्रकारों के पास रद्द कर दिए गए हैं, जिससे पूरे मीडिया जगत में नाराजगी है. उनका मानना है कि यह फैसला न केवल संबंधित पत्रकारों के साथ अन्याय है, बल्कि स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता पर भी सवाल खड़े करता है.

कोई भी आधिकारिक कार्यक्रम का कवरेज नहीं करेंगे

प्रदर्शन कर रहे पत्रकारों ने एक स्वर में मांग की कि दोनों पत्रकारों के प्रेस पास तत्काल प्रभाव से बहाल किए जाएं. उन्होंने यह भी ऐलान किया कि मांग पूरी होने तक वे विधानसभा में नेताओं के बयान, सदन की कार्यवाही और किसी भी प्रकार के आधिकारिक कार्यक्रम का कवरेज नहीं करेंगे.

पत्रकारों ने CM से तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की

पत्रकारों ने बिहार के मुख्यमंत्री से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है. उनका कहना है कि सरकार और विधानसभा प्रशासन इस विवाद का जल्द समाधान निकाले ताकि मीडिया अपने दायित्वों का निर्वहन पहले की तरह कर सके.

फिलहाल पत्रकारों के बहिष्कार के कारण विधानसभा की गतिविधियों की मीडिया कवरेज प्रभावित हुई है. अब सभी की नजर इस बात पर है कि विधानसभा प्रशासन और सरकार इस मामले में क्या फैसला लेते हैं और पत्रकारों की मांगों पर कब तक कार्रवाई होती है.