Bihar

'मेरी बात तक नहीं सुनी गई' : प्रेस वार्ता में छलका PMCH के पूर्व प्राचार्य डॉ. एनपी सिंह का दर्द

Rajnish Sinha
Sr. Copy Editor
'मेरी बात तक नहीं सुनी गई' : प्रेस वार्ता में छलका PMCH के पूर्व प्राचार्य डॉ. एनपी सिंह का दर्द

पटना (PATNA) : पीएमसीएच के पूर्व प्राचार्य डॉ. एनपी सिंह ने पद से हटाए जाने के बाद प्रेस वार्ता कर सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि बिना कोई स्पष्टीकरण मांगे उनके खिलाफ कार्रवाई की गई, जो वरिष्ठ चिकित्सकों के सम्मान के खिलाफ है. उन्होंने निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की.

इस तरह का व्यवहार उचित नहीं

डॉ. एनपी सिंह ने कहा कि वह वर्ष 1988 से पीएमसीएच में पूरी ईमानदारी और गरिमा के साथ अपनी सेवाएं देते रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ कार्रवाई करने से पहले उनका पक्ष तक नहीं सुना गया. उन्होंने कहा कि किसी भी वरिष्ठ चिकित्सक के साथ इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है.

उनका फोन तक नहीं उठाया गया

उन्होंने बताया कि हाल ही में वह एक दुर्घटना में झुलस गए थे. इसकी जानकारी उन्होंने स्वास्थ्य सचिव समेत संबंधित अधिकारियों को फोटो और संदेश भेजकर दी थी. इसके बावजूद किसी अधिकारी ने उनकी बात नहीं सुनी. उन्होंने दावा किया कि उन्होंने स्वास्थ्य सचिव को कई बार फोन किया, लेकिन उनका फोन तक नहीं उठाया गया.

डॉ. सिंह ने निजी प्रैक्टिस के आरोपों को भी खारिज किया. उन्होंने कहा कि उनका घर और क्लीनिक एक ही परिसर में है. आसपास के लोगों को जरूरत पड़ने पर देखना कोई गलत बात नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि जिस दिन उनके घर के बाहर गाड़ी लगी थी, उसकी जानकारी उन्होंने संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को पहले ही दे दी थी.

सच सामने आने पर बात करने से बचते हैं

उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में ईमानदारी से काम करने वाले लोगों के लिए जगह नहीं बची है. कुछ लोग मिलकर आरोप लगाते हैं, लेकिन सच सामने आने पर बात करने से बचते हैं. उन्होंने मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से अपील की कि किसी भी अधिकारी या चिकित्सक के खिलाफ बिना सबूत और बिना स्पष्टीकरण लिए कार्रवाई न की जाए.

डॉ. एनपी सिंह भावुक भी दिखे

प्रेस वार्ता के दौरान डॉ. एनपी सिंह भावुक भी दिखे. उन्होंने कहा कि वरिष्ठ चिकित्सकों के साथ हो रहा यह व्यवहार बेहद पीड़ादायक है और ऐसी परिस्थितियां आत्मदाह जैसी मानसिक स्थिति पैदा कर रही है. उन्होंने कहा कि यदि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए लेकिन बिना उनका पक्ष सुने निर्णय लेना न्यायसंगत नहीं है.