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बारिश आते ही डूब जाते हैं बिहार के सैकड़ों गांव, इस साल मानसून से पहले क्या है सम्राट सरकार की तैयारी?

Priyanka Kumari CE
Priyanka Kumari CE
Sr. Content Writer

टीएनपी डेस्क (TNP DESK):बिहार में मानसून का मौसम जहां किसानों के लिए खुशियां लेकर आता है, वहीं राज्य के लाखों लोगों के लिए यह चिंता और परेशानी का कारण भी बन जाता है. हर साल जून से सितंबर के बीच होने वाली भारी बारिश और नेपाल से आने वाली नदियों के उफान के कारण बिहार के सैकड़ों गांव बाढ़ की चपेट में आ जाते है.कोसी, गंडक, बागमती, कमला बलान, बूढ़ी गंडक और महानंदा जैसी नदियां कई जिलों में तबाही मचाती है.

बाढ़ को लेकर पूरी तरह से गंभीर है मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी

ऐसे में इस साल मानसून के आगमन से पहले बिहार में सम्राट सरकार ने अपने सभी अधिकारियों के साथ बैठक की है बैठक में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने निर्देश दिया है कि इस मानसून में सभी तटबंधों और बाढ़ प्रभावित इलाकों पर विशेष नजर रखी जाए.खासकर कोसी क्षेत्र में, जहां हर साल सबसे अधिक तबाही और नुकसान होता है, वहां हर संभव सहायता और जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने के लिए अधिकारियों को सतर्क रहने को कहा गया है ताकि किसी प्रकार की लापरवाही न हो.

कोसी क्षेत्र पर सरकार का विशेष फोकस

बिहार में बाढ़ की चर्चा होते ही सबसे पहले कोसी क्षेत्र का नाम सामने आता है.सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, अररिया, पूर्णिया और कटिहार जैसे जिले हर साल बाढ़ की सबसे बड़ी मार झेलते है. 'बिहार का शोक' कही जाने वाली कोसी नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी होते ही हजारों परिवार प्रभावित हो जाते है. खेत, फसल, सड़कें और घर पानी में डूब जाते हैं, जिससे लोगों का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो जाता है.यही वजह है कि इस वर्ष मानसून से पहले राज्य सरकार की तैयारियों पर सबसे अधिक नजर कोसी क्षेत्र की सुरक्षा और राहत व्यवस्था को लेकर है.

हर साल बाढ़ से जूझता है बिहार

बिहार देश के सबसे अधिक बाढ़ प्रभावित राज्यों में शामिल है.राज्य का बड़ा हिस्सा गंगा और उसकी सहायक नदियों के बेसिन में आता है.उत्तर बिहार के कई जिले हर साल बाढ़ की मार झेलते है. बाढ़ के कारण लोगों के घर, फसलें, सड़कें और सार्वजनिक संपत्तियां प्रभावित होती है. हजारों परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ता है और राहत शिविरों का सहारा लेना पड़ता है.

पुल-पुलियों की भी हो रही जांच

इसी चुनौती को देखते हुए राज्य सरकार ने मानसून से पहले तटबंधों की मरम्मत और मजबूती के काम में तेजी लाई है. जल संसाधन विभाग द्वारा विभिन्न जिलों में तटबंधों का निरीक्षण कराया जा रहा है. जिन स्थानों पर कटाव या कमजोर हिस्सों की पहचान हुई है, वहां मरम्मत और सुरक्षात्मक कार्य किए जा रहे है. सरकार का उद्देश्य है कि मानसून के दौरान नदियों के बढ़ते दबाव से तटबंधों को नुकसान न पहुंचे और आसपास के गांव सुरक्षित रहें.इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में संपर्क व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुल-पुलियों की जांच भी की जा रही है. कई जगहों पर पुराने और कमजोर पुलों की मरम्मत का काम चल रहा है ताकि बाढ़ के दौरान लोगों को आवागमन में परेशानी न हो.ग्रामीण कार्य विभाग और संबंधित एजेंसियों को समय पर सभी जरूरी कार्य पूरे करने के निर्देश दिए गए है.

राहत और बचाव की तैयारियां शुरू

बाढ़ के दौरान राहत और बचाव कार्य सबसे महत्वपूर्ण होते है. इसे ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई है. संभावित बाढ़ प्रभावित जिलों में राहत सामग्री का भंडारण किया जा रहा है. चूड़ा, गुड़, सूखा राशन, पीने का पानी, दवाइयां और अन्य आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है. साथ ही नावों और मोटरबोट की व्यवस्था भी की जा रही है ताकि जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा सके.स्वास्थ्य विभाग को भी विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए है. बाढ़ के बाद अक्सर डायरिया, मलेरिया, वायरल बुखार और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.इसके लिए मेडिकल टीमों को तैयार रखा जा रहा है. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक दवाओं का भंडारण किया जा रहा है ताकि आपात स्थिति में लोगों को तुरंत चिकित्सा सुविधा मिल सके.

शहरों में जलजमाव से निपटने की तैयारी

शहरी क्षेत्रों में जलजमाव की समस्या से निपटने के लिए भी सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है.पटना समेत कई शहरों में नालों की सफाई, ड्रेनेज सिस्टम की मरम्मत और पंपिंग स्टेशनों को दुरुस्त करने का काम चल रहा है.हर साल थोड़ी सी बारिश में जलजमाव की समस्या सामने आती है, इसलिए इस बार प्रशासन पहले से ही सतर्क नजर आ रहा है.इसके साथ ही राज्य आपदा प्रबंधन विभाग और जिला प्रशासन के कंट्रोल रूम को सक्रिय किया जा रहा है. मौसम विभाग और केंद्रीय जल आयोग से मिलने वाली सूचनाओं पर लगातार नजर रखी जाएगी.जलस्तर बढ़ने या भारी बारिश की आशंका होने पर लोगों को समय पर अलर्ट जारी किया जाएगा ताकि जान-माल के नुकसान को कम किया जा सके.

मानसून में होगी तैयारियों की असली परीक्षा

आपको बता दें कि बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पदभार संभालने के बाद राज्य में हर साल आने वाली बाढ़ की समस्या को गंभीरता से लिया है.मानसून से पहले ही उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बाढ़ प्रबंधन में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी मुख्यमंत्री अप्रैल महीने में ही राज्य के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों और तैयारियों की समीक्षा को लेकर उच्चस्तरीय बैठक कर चुके है. इस दौरान उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिया कि तटबंधों की मरम्मत, जल निकासी व्यवस्था, राहत शिविरों की तैयारी और आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी कार्य समय पर पूरे किए जाएं.मुख्यमंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि बाढ़ के दौरान लोगों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ा या राहत एवं बचाव कार्यों में लापरवाही सामने आई तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि बाढ़ से जुड़ी किसी समस्या की शिकायत स्थानीय प्रशासन या संबंधित विभाग के अधिकारियों से की जा सकती है.सरकार ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि जनता की शिकायतों का समयबद्ध समाधान हो. यदि किसी शिकायत का निपटारा एक महीने के भीतर नहीं किया जाता है, तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

नुकसान को कम करने में भी मदद मिलने की संभावना

सरकार के इन सख्त निर्देशों के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार मानसून के दौरान बिहार में बाढ़ प्रबंधन पहले की तुलना में अधिक प्रभावी होगा और लोगों को राहत मिलेगी साथ ही प्रशासनिक स्तर पर की जा रही तैयारियों से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान को कम करने में भी मदद मिलने की संभावना है.

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