Bihar

बिहार में कैसे शुरू हुई है "बखेड़ा" की राजनीति, बंगला, सुरक्षा, कंगन के बाद पोस्टर पॉलिटिक्स, अब आगे क्या

Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist
बिहार में कैसे शुरू हुई है "बखेड़ा" की राजनीति, बंगला, सुरक्षा, कंगन के बाद पोस्टर पॉलिटिक्स, अब आगे क्या

TNP DESK- बिहार में अभी "बखेड़ा" की राजनीति  चल रही है.  टारगेट लालू प्रसाद यादव का परिवार अथवा उनके सपोर्टर है,  बंगला , सुरक्षा, कंगन जैसे मुद्दों पर राजनीति तो चल ही रही थी कि फिर पोस्टर  का नया बखेड़ा शुरू हो गया है.  यह  पोस्टर  भाजपा कार्यालय के अगल-बगल राजद  कोटे से एमएलसी बने सुनील सिंह के खिलाफ लगाया गया है.  पोस्टर  किसने बनवाया, किसने लगाया, इसका अभी खुलासा नहीं हुआ है.  पहले राबड़ी देवी का आवास खाली करने के मामले में राजद  और एनडीए  नेताओं के बीच बहस हुई.  उसके बाद लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की जेड  श्रेणी की सुरक्षा को कम करने का मुद्दा गरमाया। 

लालू प्रसाद और राबड़ी देवी ने अपनी सुरक्षा वापस कर दी है 

 विरोध में लालू प्रसाद और राबड़ी देवी ने अपनी सुरक्षा वापस कर दी.  राजद  के कार्यकर्ता राबड़ी देवी आवास के गेट पर इन दिनों डटे  हुए है.   लालू प्रसाद यादव के जन्मदिन पर भोजपुरी गायक को कंगन देने का मुद्दा भी गर्म  हो गया है.  दरअसल, लालू प्रसाद यादव के जन्मदिन पर राबड़ी देवी ने भोजपुरी गायक को अपने हाथों से कंगन निकालकर नज़राने के रूप में दे दिया।  गायक छोटू छलिया ने इसे सोने का कंगन बता दिया।  फिर तो यह मामला सियासी हो गया.  जदयू ने कंगन पर सवालों की बरसात कर दी है.  जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने इस मामले की ईडी  से जांच कराने  की मांग की है और पूछा है कि इतना महंगा कंगन राबड़ी देवी के पास आया कहां से? 

विवाद बढ़ा तो कंगन को आर्टिफीसियल बता दिया गया 

विवाद जब बढ़ गया तो एमएलसी सुनील सिंह ने कंगन को आर्टिफिशियल बता दिया है.  जदयू के प्रवक्ता ने पूछा है कि  राबड़ी देवी ने जो हीरे का कंगन गायक को दिया है ,वह कहां से आया? अगर खरीदा है तो बिल दिखाएं, अगर किसी ने उन्हें दिया है तो उसका नाम बताएं, नहीं तो ईडी  इस मामले की जांच कर स्थिति स्पष्ट करे.  कंगन पर मचे सियासी घमासान के बीच  एमएलसी सुनील सिंह ने सफाई दी है.  उन्होंने कहा है कि जिस कंगन पर नेता सियासत कर रहे हैं, वह आर्टिफिशियल है.  दरअसल, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी सरकार के क्रियाकलापों पर सवाल खड़े कर रहे है.  इस बीच "बखेड़ा" की राजनीति शुरू हो गई है.  यह  राजनीतिक किसको कितना लाभ देगी, यह  देखने वाली बात होगी।