पटना(PATNA): राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर और मज़बूत करने के उदेश्य से विभागीय सचिव ने उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की. बैठक में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बेहतर सुविधा करने का निर्देश दिया है. जिससे प्रखंड स्तर पर मरीजों का इलाज किया जा सके. साथ ही राज्य में आयुष्मान योजना के तहत अस्पताल के प्रदर्शन को दुरुस्त करने पर जोर दिया है. बैठक स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की गई. जिसमें सभी जिलों के सिविल सर्जन, अस्पताल अधीक्षक एवं स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारी शामिल हुए.बैठक में डॉ. त्यागराजन एस. एम., विशेष सचिव, स्वास्थ्य विभाग, अरविंद कुमार वर्मा, विशेष सचिव, स्वास्थ्य विभाग, सुब्रत कुमार सेन, प्रबंध निदेशक, बीएमएसआईसीएल (BMSICL), वैभव चौधरी, कार्यपालक निदेशक, राज्य आयुष समिति, स्पर्श गुप्ता, अपर कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति समेत अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे.
बैठक में सदर अस्पतालों की रेफरल व्यवस्था को मजबूत करने, चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने, सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के साथ आयुष्मान भारत योजना के तहत अस्पतालों के प्रदर्शन को बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा की गई.
रेफरल और बुनियादी जांच पर जोर
समीक्षा बैठक के दौरान स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि ने निर्देश दिया कि अब कोई भी रेफरल बिना ऑनलाइन ‘भव्या पोर्टल’ (Bhavya Portal) पर दर्ज किए और मरीज की बुनियादी जांच (Basic Diagnostics) किए बिना नहीं किया जाएगा। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) से मरीजों को सीधे बड़े अस्पतालों में भेजने की व्यवस्था को न्यूनतम किया जाएगा.
24x7 आपातकालीन सेवाएं और ट्राइएज प्रणाली
सभी जिला अस्पतालों में 24 घंटे आपातकालीन सेवाओं के सुदृढ़ संचालन और ‘ट्राइएज प्रणाली’ लागू करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अस्पताल पहुंचते ही मरीजों को उनकी स्थिति के आधार पर प्राथमिकता देते हुए त्वरित उपचार उपलब्ध कराया जा सके. इसके लिए राज्य स्वास्थ्य समिति द्वारा पहले ही दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं.
ICU, 70 प्रकार की सर्जरी और OT सुदृढ़ीकरण
सभी जिला अस्पतालों में वेंटिलेटर युक्त गहन चिकित्सा इकाई (ICU) को तत्काल क्रियाशील करने का निर्देश दिया गया है. जिला अस्पतालों को 70 प्रकार की सर्जरी सुनिश्चित करने का लक्ष्य दिया गया है.इसके लिए स्त्री रोग (Gyne), सामान्य सर्जरी और हड्डी रोग (Ortho) के लिए अलग-अलग एवं क्रियाशील ऑपरेशन थिएटर (OT) विकसित करने को कहा गया है. जहां जगह की कमी है, वहां प्री-फैब (Pre-fab) संरचनाओं का उपयोग करने का सुझाव दिया गया है.
आयुष्मान भारत के दावों को प्रदर्शन का पैमाना बनाने का निर्देश
अस्पतालों के प्रदर्शन का आकलन अब आयुष्मान भारत योजना के तहत किए गए दावों (Claims) के आधार पर किया जाएगा.स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि सरकारी चिकित्सक मरीजों को सरकारी अस्पतालों में उपचार उपलब्ध कराने के बजाय निजी अस्पतालों में न भेजें, बल्कि जिला अस्पतालों में ही आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों का उपचार सुनिश्चित करें.
स्वास्थ्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिया कि पूरे जिले को एक इकाई मानकर कार्य किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी स्वास्थ्य संस्थान PHC, CHC, SDH और DH एक चेन की तरह काम करें, ताकि मरीजों को उपचार के लिए अनावश्यक परेशान न होना पड़े.विभाग द्वारा इन निर्देशों के अनुपालन की नियमित रूप से समीक्षा की जाएगी.
ड्यूटी रोस्टर का सख्ती से होगा पालन
बैठक में चिकित्सकों की ड्यूटी और रोस्टर के पालन को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए गए. कहा गया कि प्रत्येक अस्पताल में चिकित्सकों की निर्धारित ड्यूटी सुनिश्चित की जाए. निरीक्षण के दौरान यदि कोई चिकित्सक ड्यूटी से अनधिकृत रूप से अनुपस्थित पाया जाता है या सरकारी अस्पताल की ड्यूटी के समय निजी क्लिनिक में कार्य करता पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी.
सर्जरी को बढ़ावा देने का निर्देश
बैठक में निर्देश दिया गया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत सदर अस्पतालों में सेवाओं को केवल सिजेरियन डिलीवरी तक सीमित न रखा जाए.ऑर्थोपेडिक, हर्निया, अपेंडिक्स, फिशर, फिस्टुला और मोतियाबिंद जैसी अन्य सर्जरी भी सदर अस्पतालों में अधिक से अधिक की जाएं और पात्र मरीजों के उपचार के क्लेम समय पर दर्ज किए जाएं.इससे एक ओर सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध संसाधनों और विशेषज्ञता का बेहतर उपयोग होगा, वहीं दूसरी ओर मरीजों को अपने जिले में ही आवश्यक उपचार की सुविधा मिल सकेगी.
जिला अस्पतालों में जुलाई माह में हुई 5651 सर्जरी
राज्य के जिला अस्पतालों में सर्जिकल सेवाओं की उपलब्धता और क्षमता में लगातार सुधार दर्ज किया जा रहा है. विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में राज्य के जिला अस्पतालों में कुल 5651 सर्जरी हुईं.इस अवधि में अररिया 423 सर्जरी के साथ सर्वाधिक सर्जरी करने वाला जिला रहा.साथ ही नालंदा में 327, भोजपुर में 301 वैशाली में 292, मधुबनी में 287 सर्जरी दर्ज की गईं। इन जिलों में एलएससीएस, बीटीएल, एमटीपी, मोतियाबिंद सर्जरी, हर्निया रिपेयर, हाइड्रोसील, अपेंडिक्स, ऑर्थोपेडिक तथा अन्य आवश्यक सर्जरी की गईं. यह उपलब्धि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में बढ़ती सर्जिकल क्षमता और मरीजों को समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाती है.
सदर अस्पताल, सासाराम और सदर अस्पताल, मुंगेर में मरीजों को बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार सर्जरी की जा रही हैं.सदर अस्पताल, सासाराम में 11 अगस्त को 24 घंटे के दौरान कुल 20 सर्जरी सफलतापूर्वक की गईं। वहीं, सदर अस्पताल, मुंगेर में 10 घंटे के दौरान कुल 12 सर्जरी सफलतापूर्वक की गईं. दोनों अस्पतालों में चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की टीमें मरीजों को समय पर बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के लिए निरंतर तत्परता से कार्य कर रहे हैं.
बैठक में स्वास्थ्य सचिव ने स्पष्ट कहा कि अस्पतालों के संचालन, ऑनलाइन सिस्टम, उपकरणों अथवा अन्य तकनीकी एवं व्यावहारिक समस्याओं के समाधान के लिए विभाग पूरी तरह सहयोग करेगा. सिविल सर्जन और अस्पताल अधीक्षक अपनी समस्याओं से विभाग को अवगत कराएं, ताकि उनका समयबद्ध समाधान किया जा सके.
बैठक में सभी अधिकारियों और चिकित्सकों से टीम भावना के साथ कार्य करने तथा सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को और मजबूत बनाने में अपनी भूमिका निभाने की अपील की गई. सदर अस्पतालों की सेवाओं में सुधार, चिकित्सकों की नियमित उपलब्धता, अनावश्यक रेफरल में कमी और आयुष्मान भारत के तहत उपचार का दायरा बढ़ाने से आमजन को अपने जिले में ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी.
