Bihar

बिहार के ग्रेजुएशन छात्रों के लिए बड़ी खुशखबरी! पढ़ाई के साथ मिलेगी नौकरी की ट्रेनिंग और इतने रुपये

Priyanka Kumari CE
Sr. Content Writer
बिहार के ग्रेजुएशन छात्रों के लिए बड़ी खुशखबरी! पढ़ाई के साथ मिलेगी नौकरी की ट्रेनिंग और इतने रुपये

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): बिहार में ग्रेजुएशन की पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं के लिए सरकार की ओर से एक बड़ा ऐलान किया गया है.बिहार के विश्वविद्यालयों में अब चार साल के ग्रेजुएशन के दौरान यूजीएईडीपी (Undergraduate Apprenticeship Embedded Degree Programme) की नई व्यवस्था लागू की जाएगी. इस व्यवस्था के तहत ग्रेजुएशन की पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के साथ किसी कंपनी, उद्योग या संस्थान में अप्रेंटिसशिप का मौका दिया जाएगा.वहीं, इस अप्रेंटिसशिप के दौरान छात्रों को हर महीने 12,300 रुपये स्टाइपेंड के रूप में दिए जाएंगे.यानी अब बिहार के युवा पढ़ाई के साथ-साथ कमाई भी कर सकेंगे और अपनी पढ़ाई से लेकर अन्य खर्च भी खुद उठा पाएंगे.

उच्च शिक्षा को सीधे रोजगार से जोड़ने की दिशा में बड़ी पहल

राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने बताया कि बिहार में उच्च शिक्षा को सीधे रोजगार से जोड़ने की दिशा में यह एक बड़ी पहल है.अगले शैक्षणिक सत्र से सभी विश्वविद्यालयों में इस कार्यक्रम को लागू करने की तैयारी की जा रही है.आपको बता दें कि इस सत्र से बिहार के चार विश्वविद्यालयों, पटना विश्वविद्यालय, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय और पूर्णिया विश्वविद्यालय में इसे लागू करने पर सहमति बन चुकी है.

उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी की कार्यक्रम की सराहना

राज्यपाल की अध्यक्षता में आयोजित उच्च शिक्षा समीक्षा बैठक में बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी इस कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि यह छात्रों को पढ़ाई के साथ रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराएगा.इस कार्यक्रम के तहत ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान छात्र-छात्राएं किसी भी विषय में व्यावहारिक अनुभव हासिल कर सकेंगे, जिससे पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्हें अच्छी नौकरी मिलने में आसानी होगी. पढ़ाई के दौरान उन्हें किसी उद्योग या संस्थान में अप्रेंटिसशिप करनी होगी. अप्रेंटिसशिप का मूल्यांकन भी किया जाएगा और उसके अंक अंतिम डिग्री में शामिल किए जाएंगे.

परिवार पर आर्थिक बोझ भी कम होगा 

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के आधार पर चार वर्षीय पाठ्यक्रम में 75 प्रतिशत हिस्सा पारंपरिक शैक्षणिक अध्ययन का होगा, जबकि 25 प्रतिशत हिस्सा इंडस्ट्री आधारित अप्रेंटिसशिप को समर्पित रहेगा.इसका सबसे बड़ा फायदा छात्र-छात्राओं को यह होगा कि वे पढ़ाई के दौरान ही कार्य का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त कर सकेंगे. इससे उन्हें नौकरी के दौरान किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा.साथ ही, उन्हें इसके लिए स्टाइपेंड भी मिलेगा, जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकेंगे और परिवार पर आर्थिक बोझ भी कम होगा.