पटना: बिहार में अब नया बिजली कनेक्शन लेना आसान हो गया. केंद्र सरकार और बिहार विद्युत विनियामक आयोग के नए आदेश के बाद आसानी ने बिजली कनेक्शन ले सकते है. नए कनेक्शन के लिए अब 'फिजिकल वेरिफिकेशन' लो बाध्यता हटा दी गई है. अब कुछ स्टेप को फॉलो करने के बाद कनेक्शन शुरू कर दिया जाएगा. जिससे ग्रामीण इलाके में रहने वाले उपभोक्ताओं को एक बड़ी राहत मिली है.
केंद्र सरकार और बिहार विद्युत विनियामक आयोग (BERC) के नए आदेश के मुताबिक अब 150 किलोवाट तक के कनेक्शन के लिए नियम में बदलाव किया है. नए नियम के मुताबिक अब 'फिजिकल वेरिफिकेशन' यानी जमीन या मकान की पहले होने वाली जांच-पड़ताल और नाप-जोख को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है. यह नियम आम जनता और ग्रामीण उपभोक्ताओं की सहूलियत के लिए आसान बनाए गए हैं.
अब क्या बड़े बदलाव हुए हैं?
सामान, मजदूरी और देखरेख का अलग खर्च बंद: पहले तार, पोल या अन्य सामान (मटेरियल), मजदूरी (लेबर) और जांच (सुपरविजन) का अलग-अलग एस्टिमेट बनता था. अब यह सब झंझट पूरी तरह खत्म कर दिया गया है.
सीधे तय फीस जमा करें: अब लोड के हिसाब से एकमुश्त मानक फीस तय कर दी गई है. मोबाइल ऐप ('सुविधा' ऐप) या पोर्टल पर आवेदन करते ही साफ दिख जाएगा कि कितना पैसा लगेगा.
घर तक तार और मीटर कंपनी लगाएगी: तय फीस ऑनलाइन जमा होते ही बिजली कंपनी खुद आपके परिसर तक सर्विस तार और मीटर लगाने का काम पूरा करेगी.
नए बिजली कनेक्शन के लिए तय मानक शुल्क (Service Connection Charges)
कनेक्शन की श्रेणी | लोड (भार) | तय मानक शुल्क
- सिंगल फेज (घरेलू व अन्य) 3 किलोवाट तक ₹900/- प्रति किलोवाट (यानी 3 kW पर कुल ₹2,700/-)
- सिंगल फेज (घरेलू व अन्य) 3 kW से अधिक (7 kW तक) 3 kW के लिए ₹2,700/- तथा 3 kW से ऊपर प्रति किलोवाट ₹1,000/- अतिरिक्त
- थ्री फेज (3-Phase) | 5 kW से 19 kW तक | 5 kW तक ₹4,500/- तथा 5 kW से ऊपर प्रति किलोवाट ₹1,500/- अतिरिक्त
- थ्री फेज (3-Phase) | 20 kW से 44 kW तक | 20 kW तक ₹21,000/- तथा 20 kW से ऊपर प्रति किलोवाट ₹2,000/- अतिरिक्त |
एचटी (HT कनेक्शन) | 45 kW से 150 kW तक | ₹7,000/- प्रति किलोवाट |
आम जनता और ग्रामीणों को क्या फायदा होगा?
अलग से कोई एस्टिमेट, मटेरियल चार्ज या लेबर चार्ज नहीं लगेगा
तेजी से मिलेगा कनेक्शन: अब फीस जमा करते ही तय समयसीमा में कनेक्शन मिल जाएगा।
पारदर्शी और आसान व्यवस्था: मोबाइल से आवेदन करते ही कंप्यूटर से तय फीस दिखेगी, जिसे जमा करते ही मीटर लगाने की कार्रवाई शुरू हो जाएगी।
यह व्यवस्था इसलिए लागू की गई है ताकि गांव-कस्बों के लोगों, किसानों और छोटे दुकानदारों को बिना किसी परेशानी और बिना किसी देरी के तुरंत नया बिजली कनेक्शन मिल सके.
