पटना (PATNA): बिहार में बाढ़ का संकट अभी खत्म नहीं हुआ है. गंगा के कई प्रमुख जलमापक केंद्रों पर पानी कम होने लगा है, लेकिन नदी अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है. दूसरी ओर पुनपुन और बागमती के बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन के साथ निचले और तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है.
पटना में खतरे के निशान से ऊपर गंगा
जल संसाधन विभाग के सोमवार सुबह छह बजे के आंकड़ों के मुताबिक पटना के दीघा में गंगा का जलस्तर 50.81 मीटर दर्ज हुआ. यह 50.45 मीटर के खतरे के निशान से 0.36 मीटर ऊपर है. गांधी घाट पर गंगा 49.61 मीटर पर बह रही है, जो खतरे के स्तर से 1.01 मीटर अधिक है. हथिदह में जलस्तर 42.82 मीटर दर्ज किया गया, जबकि मुंगेर में 39.38 मीटर, भागलपुर में 34.18 मीटर और कहलगांव में 32.49 मीटर रिकॉर्ड हुआ. राहत की बात यह है कि इन प्रमुख केंद्रों पर गंगा के जलस्तर में गिरावट का रुख बना हुआ है.बक्सर में गंगा 59.42 मीटर पर दर्ज की गई, जो 60.32 मीटर के खतरे के निशान से 0.90 मीटर नीचे है. हालांकि यहां जलस्तर अभी चेतावनी स्तर से ऊपर बना हुआ है. वाराणसी और प्रयागराज में भी गंगा खतरे के निशान से नीचे बह रही है और पानी घट रहा है. इससे बिहार में आने वाले दिनों में गंगा के स्तर में और कमी की उम्मीद बढ़ी है.
पुनपुन और बागमती का जलस्तर बढ़ा
गंगा में गिरावट के बीच पुनपुन और बागमती चिंता बढ़ा रही हैं. श्रीपालपुर में पुनपुन 51.94 मीटर पर पहुंच गई है, जो खतरे के निशान से 1.34 मीटर ऊपर है. बेनीबाद में बागमती 49.20 मीटर पर बह रही है और खतरे के स्तर से 0.52 मीटर ऊपर है. दोनों स्थानों पर पानी बढ़ने का रुख दर्ज किया गया है. कोसी भी बलतारा और कुरसेला में खतरे के निशान से ऊपर है. बूढ़ी गंडक खगड़िया और घाघरा दरौली में भी निर्धारित खतरे के स्तर को पार कर चुकी हैं.वीरपुर बराज से कोसी में सोमवार सुबह आठ बजे 1,55,710 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था. वाल्मीकिनगर बराज से गंडक में 86,000 क्यूसेक और इंद्रपुरी बराज से सोन में 52,097 क्यूसेक पानी छोड़ा गया. ऐसे में निचले इलाकों में बाढ़ का जोखिम फिलहाल बना हुआ है और नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है.
