Bihar

पटना में बाढ़ का खतरा गहराया, सुरक्षा दीवार के 108 रास्ते बंद, दियारा इलाकों से पलायन तेज

Rajnish Sinha
Rajnish Sinha
Sr. Copy Editor

पटना(PATNA): राजधानी पटना में गंगा समेत कई नदियों के बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है. शहर के निचले हिस्सों और दियारा क्षेत्रों में पानी पहुंचने से बड़ी आबादी प्रभावित हुई है. कई घरों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है और लोग सुरक्षित स्थानों की ओर जा रहे हैं. हालात को देखते हुए प्रशासन ने पटना की सुरक्षा दीवार से जुड़े सभी 108 रास्तों को बंद कर दिया है.

स्लूइस गेटों की चौबीसों घंटे निगरानी 

निरीक्षण के दौरान सुरक्षा दीवार और कुछ स्लूइस गेटों से रिसाव की जानकारी सामने आई. इसके बाद 13 स्लूइस गेटों के सीपेज को सील कराया गया. नालों से गंगा का बैकवॉटर शहर में प्रवेश न करे, इसके लिए भी आवश्यक कदम उठाए गए हैं. स्लूइस गेट, नाले, पंपिंग स्टेशन और तटबंध लगातार निगरानी में हैं. मनेर का इस्लामगंज गांव गंगा और सोन के पानी से घिरने के कारण टापू जैसा बन गया है. सड़क संपर्क प्रभावित होने से नावें लोगों के आवागमन का प्रमुख साधन बन गई हैं. दानापुर की छह पंचायतों में भी पानी फैल चुका है. प्रभावित परिवार मवेशियों और जरूरी सामान के साथ राहत शिविरों तथा ऊंचे स्थानों की ओर जा रहे हैं.

दरधा नदी का तटबंध टूटा 

धनरूआ क्षेत्र में दरधा नदी के बढ़ते दबाव के बीच बीर के महुआतड़ के पास तटबंध का करीब 20 से 25 फीट हिस्सा टूट गया. इसके बाद आसपास के रिहायशी इलाकों में तेजी से पानी फैल गया और लगभग 30 घर प्रभावित हुए. खेतों में लगी धान और मकई की फसल भी पानी में डूब गई है. मोकामा के दियारा क्षेत्रों में भी बाढ़ का असर बढ़ा है. जंजीरा दियारा से 150 से अधिक लोग मवेशियों के साथ सुरक्षित स्थान पर पहुंच चुके हैं. दूसरी ओर बिंदटोली, दीघा, एलसीटी घाट, राजापुर और पटना सिटी के कुछ इलाकों तक भी पानी पहुंचने लगा है.

66 नावें और SDRF की टीम तैनात 

प्रशासन ने प्रभावित इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए 66 नावें चलाने की व्यवस्था की है. सामुदायिक रसोई, राहत शिविर और पशु शिविर भी संचालित किए जा रहे हैं. प्रमुख घाटों पर मोटरबोट के साथ SDRF की टीमों को तैनात किया गया है. पुनपुन नदी का जलस्तर 52.82 मीटर दर्ज किया गया, जो 50.60 मीटर के खतरे के निशान से ऊपर है. हालांकि गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी की गति कुछ कम हुई है, लेकिन खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है. प्रशासन के सामने फिलहाल लोगों और मवेशियों को सुरक्षित निकालने तथा प्रभावित परिवारों तक भोजन, पानी और जरूरी राहत सामग्री पहुंचाने की बड़ी चुनौती है.

 

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