टीएनपी डेस्क(TNP DESK):बिहार सरकार राज्य के छात्रों, महिलाओं, वृद्धजनों के साथ किसानों को लेकर कई तरह की योजनाएं चलाती हैं, ताकि इनके जीवन में आर्थिक संकट और परेशानी को थोड़ा कम किया जा सके. इन्हीं योजनाओं में एक है बिहार राज्य फसल सहायता योजना. इस योजना के तहत उन सभी किसानों को आर्थिक मदद दी जाती है, जिनकी फसल प्राकृतिक आपदाओं की वजह से नष्ट हो जाती है. जिसमें बाढ़, सूखा, वज्रपात, आंधी-तूफान की वजह से किसानों की फसल को भारी नुकसान उठाना पड़ता है. ऐसे किसानों को बिहार सरकार की ओर से पैसे दिए जाते हैं, ताकि किसानों के आर्थिक बोझ और कर्ज को हल्का किया जा सके. हालांकि, इसको लेकर कई नियम और नीतियां निर्धारित की गई हैं, जिसके आधार पर ही सहायता दी जाती है.
फसल बर्बाद होने पर सरकार करती है आर्थिक मदद
आपको बता दें कि खेतों में लगी फसल के लिए किसान काफी कड़ी मेहनत करते हैं, लेकिन कभी-कभी प्राकृतिक आपदाओं की वजह से उनकी फसल खराब हो जाती है या नष्ट और बर्बाद हो जाती है. ऐसे किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है और बहुत से किसान ऐसे हैं, जो कर्ज लेकर खेती करते हैं. ऐसे किसान कर्ज के तले दब जाते हैं. फिर बहुत सारे मामले ऐसे भी देखने को मिलते हैं, जब कर्ज के दबाव में आकर किसान आत्महत्या तक करने लगते हैं. ऐसी ही समस्या को देखते हुए बिहार सरकार ने इस योजना की शुरुआत की है, ताकि पैसे की वजह से किसी भी किसान को परेशानी न हो.
पढ़े क्या है सरकार का उद्देश्य
दरअसल, किसानों की आमदनी काफी हद तक उनके खेतों में लगी फसल और अच्छी उपज पर निर्भर करती है. ऐसे में अगर कोई आपदा आ जाती है, तो फिर प्रतिकूल मौसम की वजह से उपज कम होती है. किसान बीज, खाद, सिंचाई और खेती में लगे खर्च किए गए पैसे का नुकसान उठाने में काफी परेशानी होती है. किसानों के ऊपर से इसी जोखिम को कम करने के लिए बिहार सरकार ने इस फसल सहायता योजना की शुरुआत की है. इसके जरिए सरकार प्रयास करती है कि फसल के नुकसान से प्रभावित किसानों को आर्थिक सहारा दिया जा सके, ताकि किसान अगली फसल अच्छे से खेतों में लगा सकें. इस योजना के तहत किसी को पैसे देने का मौका नहीं मिलता, क्योंकि बैंक डीबीटी के माध्यम से पैसे खाते में भेज दिए जाते हैं.
आख़िर कितने रुपये तक की मदद करती है सरकार
अब आपके मन में सवाल उठता है कि आखिर इस योजना के तहत किसानों को कितना तक का लाभ दिया जाता है. तो आपको बता दें कि इस योजना के तहत फसल की व्यापक उपज होने के आधार पर सहायता राशि दी जाती है, जहां 20% तक फसल क्षति होने पर प्रति 7,500 रुपये प्रति हेक्टेयर और 20% से अधिक फसल क्षति होने पर प्रति 10,000 रुपये प्रति हेक्टेयर के हिसाब से पैसे दिए जाते हैं. हालांकि, आमतौर पर यह सहायता राशि ज्यादा से ज्यादा दो हेक्टेयर तक के लिए ही दी जाती है. यानी निर्धारित दर के आधार पर किसान को अधिकतम 20,000 रुपये तक की सहायता मिल सकती है. हालांकि, व्यापक लाभ संबंधित सीजन की सरकारी अधिसूचना, फसल और पात्रता नियमों के अनुसार तय होता है. अब चलिए बता देते हैं कि इस योजना का लाभ कैसे किसान ले सकते हैं.
कौन कौन कर सकता है आवेदन
आपको बता दें कि यह योजना रैयत और गैर-रैयत दोनों किसानों के लिए है. दोनों किसान आवेदन करने के लिए पात्र हैं, लेकिन शर्त यह है कि संबंधित सीजन और फसल के लिए सरकार की ओर से पात्रता शर्तों को पूरा करते हों. रैयत किसान वह होता है, जिसके नाम पर जमीन दर्ज होती है, जबकि गैर-रैयत किसान दूसरे की जमीन पर खेती करने वाला किसान हो सकता है.
योजना का लाभ लेने के लिए इन बातों का रखें ध्यान
बिहार राज्य फसल सहायता योजना के लिए सबसे पहले आपको कृषि विभाग में किसान निबंधन होना जरूरी है. आधिकारिक वेबसाइटपोर्टल पर स्पष्ट किया जाता है कि किसान पंजीकरण संख्या के बिना योजना के लिए आवेदन नहीं किया जा सकता है, क्योंकि इस योजना के आवेदन के समय आपको रजिस्ट्रेशन नंबर और संबंधित जानकारी देनी होती है. इसके साथ रैयत किसानों को अपनी जमीन से जुड़े दस्तावेज और वित्तीय वर्ष की राजस्व रसीद या भूमि से जुड़े प्रमाण मांगे जाते हैं.
कैसे किया जा सकता है आवेदन
अब चलिए आपको बताते हैं कि आप कैसे आवेदन कर सकते हैं. तो आपको बता दें कि इसके लिए आवेदन ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों किया जा सकता है. अगर आप ऑनलाइन आवेदन कर रहे हैं, तो सबसे पहले किसानों को बिहार कृषि विभाग के डीबीटी पोर्टल पर निबंधन कराना होता है. अगर किसान पहले से पंजीकृत है, तो आगे की प्रक्रिया को पूरा किया जाता है.
