Bihar

Bihar: कचरे को बनाया कमाई का जरिया, पंचायत ने तैयार कर डाली 1700 क्विंटल जैविक खाद

Rajnish Sinha
Rajnish Sinha
Sr. Copy Editor

पटना (PATNA) : पश्चिम चंपारण की डुमरी ग्राम पंचायत ने गांव से निकलने वाले कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलकर स्वच्छता और आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह तैयार की है. पंचायत में घरों से एकत्र किए जाने वाले जैविक कचरे, गोबर और कृषि अवशेषों से अब तक करीब 1700 क्विंटल जैविक खाद तैयार की गई है. इस खाद को स्थानीय किसानों को किफायती दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है. इससे जहां किसानों को खेती के लिए सस्ता विकल्प मिला है, वहीं पंचायत के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत भी विकसित हुआ है.

2023 में शुरू हुई कचरा प्रबंधन की नई व्यवस्था

योगापट्टी प्रखंड मुख्यालय से करीब पांच किलोमीटर दूर डुमरी पंचायत में लगभग 3,430 परिवार रहते हैं. पहले घरों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों से निकलने वाले कचरे का व्यवस्थित निस्तारण बड़ी चुनौती थी. वर्ष 2023 में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) और लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत पंचायत में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था शुरू की गई.पंचायत के 15 वार्डों में घर-घर से कचरा जुटाने के लिए 15 ठेला रिक्शा और एक बैटरी रिक्शा लगाया गया. प्रत्येक वार्ड में स्वच्छता कर्मी के साथ पंचायत स्तर पर एक स्वच्छता पर्यवेक्षक को भी जिम्मेदारी दी गई.

कचरे से खाद,खाद से पंचायत को आमदनी 

एकत्र गीले और सूखे कचरे को अपशिष्ट प्रसंस्करण इकाई तक पहुंचाकर अलग-अलग तरीके से निस्तारित किया जाता है. गीले कचरे, गोबर और खेती से निकलने वाले जैविक अवशेषों का इस्तेमाल खाद तैयार करने में हो रहा है. अब तक लगभग 1700 क्विंटल खाद का उत्पादन किया जा चुका है. स्थानीय किसानों को यह खाद कम कीमत पर मिलने से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाने का विकल्प मिला है. साथ ही पंचायत स्तर पर जैविक खेती को प्रोत्साहन देने की दिशा में भी यह व्यवस्था उपयोगी साबित हो रही है.

खाद की कमाई से चल रही स्वच्छता व्यवस्था 

जैविक खाद की बिक्री से मिलने वाली राशि पंचायत के ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन खाते में जमा होती है. इसका उपयोग कचरा संग्रहण में लगे ठेला और ई-रिक्शा की मरम्मत तथा स्वच्छता से जुड़ी परिसंपत्तियों के रखरखाव में किया जा रहा है. उप विकास आयुक्त काजले विभव नितिन के अनुसार, डुमरी पंचायत की पहल ने कचरे के प्रबंधन को स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ दिया है. इस मॉडल में कचरा निस्तारण, जैविक खेती और पंचायत की आय एक-दूसरे के पूरक बन रहे हैं. डुमरी का प्रयोग दिखाता है कि गांवों में कचरे का योजनाबद्ध प्रबंधन स्वच्छता के साथ स्थानीय स्तर पर आय और संसाधनों के पुनः उपयोग का टिकाऊ माध्यम बन सकता है.

 

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