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कांग्रेस तब तक नहीं जीतेगी चुनाव जब तक..., केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने विपक्ष पर किया हमला

Manjesh Kumar Patna
Manjesh Kumar Patna
Senior News Publisher • TheNewsPost.in

पटना: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर मॉक पार्लियामेंट कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कांग्रेस के इस आयोजन को लेकर लोजपा(रा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने जोरदार हमला किया. उन्होंने कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन और 1 नवंबर को आयोजित होने वाली रैली को लेकर भी हमला किया और कहा कि मुझे नहीं समझ आ रहा है कि क्या कारण है लेकिन सिखों के नरसंहार के बरसी पर अपनी ताकत दिखा कर उनके जले पर नमक छिड़कने का काम करेंगे. इस दौरान उन्होंने अनंत सिंह की जमानत सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए जाने को लेकर भी बड़ी बात कही.

सदन में बात रखने की जगह करते हैं बाधित

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कांग्रेस के मॉक पार्लियामेंट को लेकर कहा कि बचपन में हमलोग स्कूल और कॉलेज में पार्लियामेंट तैयार कर प्रैक्टिस करते थे कि सदन में कार्रवाई कैसे होती है. ये लोग तो सदन के सदस्य हैं. इस तरह से मॉक पार्लियामेंट करना कितना जायज है, इन्हें खुद तय करना है. मैं मानता हूं कि जब अपनी बातें रखने के लिए सदन मौजूद है तो आप वहां क्यों नहीं रखते. इन लोगों ने एक पैटर्न तैयार कर लिया है कि जब सदन चलता है तो किसी एक मुद्दे  को लेकर पूरा सत्र बाधित कर देते हैं. इस बार बजट और मानसून सत्र कैसे चला सबने देखा. मैं भविष्य वक्ता तो नहीं हूं लेकिन उम्मीद है कि ये इस सत्र में भी किसी मुद्दे को लेकर बाधित करेंगे.

हर सत्र से पहले एक विषय उठाना और सदन न चलने देना, इससे लाखों करोड़ों की बर्बादी तो होती ही है. वह मंच जहां देश की आबादी इंतजार कर रही होती है कि हमारे प्रतिनिधि हमारे लिए क्या बातें करते हैं लेकिन ये लोग उस मंच पर मौका को गंवा देते हैं. उन्हें जिस विषय पर एतराज है, सरकार सारे विषय पर चर्चा करने के लिए तैयार है लेकिन ये लोग चलने नहीं देंगे और इस तरह से मॉक पार्लियामेंट कर रहे हैं. मुझे तो ताज्जुब होता है कि इनके वह घटक दल वहां कैसे जा रहे हैं जो इनकी ही वजह से उन्हें भी मौका नहीं मिलता है. बंगाल चुनाव के पहले टीएमसी के सांसद अपनी बात रखना चाहते थे लेकिन इन्होंने मौका ही नहीं दिया और परिणाम सबके सामने है.

बैलेट से हुए चुनाव में क्यों नहीं जीती कांग्रेस

ये लोग पहले SIR का मुद्दा बनाया तो अब तो बैलेट से चुनाव हुआ, क्या हुआ कांग्रेस का. इसके साथ ही कई राज्य है जहां दशकों से कांग्रेस की सरकार नहीं है, तब तो न ईवीएम था और न ही एसआईआर हुआ था, फिर सत्ता से बाहर क्यों थे? कई ऐसे राज्य हैं जहां दशकों से ये सत्ता में नहीं है . बैलेट से चुनाव हुआ तो यहां दो निर्दलीय जीत गए लेकिन कांग्रेस नहीं जीती. ये बस अपना और अपने सहयोगियों का समय बर्बाद कर रहे हैं.

आमलोग और व्यापारी को कर रहे हैं परेशान

चिराग पासवान ने कांग्रेस की रैली को लेकर कहा कि आप कीजिए कोई दिक्कत नहीं है. लेकिन समय देखिए. व्यापारी वर्ग के लिए साल भर में कमाने का एक बड़ा मौका सामने है, ऐसे में जब लोग सबसे अधिक खरीददारी करते हैं तभी आपने रैली शुरू कर दी. आप व्यापारी को परेशान कर रहे हैं. व्यापारियों ने विनम्र निवेदन की लेकिन नहीं मान रहे. ये लोग बस लोगों को परेशान कर रहे हैं. खास कर ये लोग 1 नवंबर की चिंता तो करते कि इसी दिन उसी दिल्ली में सिखों का नरसंहार किया गया था और अब उसी दिन कांग्रेस अपनी ताकत का प्रदर्शन कर उनके जख्मों पर नमक छिड़कने वाली काम करने जा रही है.

न्यायिक प्रक्रिया पर नो कमेंट

चिराग पासवान ने सुप्रीम कोर्ट से अनंत सिंह की जमानत रद्द करने के सवाल पर कहा कि यह न्यायिक प्रक्रिया है और यह पहले से तय था कि इस दिन यह फैसला होगा. मुझे लगता है न्यायिक प्रक्रिया पर किसी को टिप्पणी नहीं करना चाहिए.

खुद जीतें तो अच्छा, हार गए तो चुनाव आयोग जिम्मेवार

वहीं उन्होंने अनंत सिंह को सरकार के द्वारा फंसाने संबंधी तेजस्वी बयान पर कहा कि मैं सोच कर परेशान हूं कि उनलोगों को विश्वास किस पर है. सभी संस्थानों पर सवाल खड़े किए हैं, चुनाव आयोग पर भरोसा नहीं है, न्याय प्रणाली पर भरोसा नहीं है, संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़ा करते हैं. साथ ही ये लोग ऐसे लोगों को साथ रखते हैं कि दिमागी नक्सल हैं, अराजकता फैलाने की बात करते हैं, बांग्लादेश का उदाहरण देते हैं. वह चाहते हैं कि यूरोप, बांग्लादेश, नेपाल की तरह भारत जले और बर्बाद हो. खुद को बचाने और व्यक्तिगत लाभ के लिए देश विरोधी सोच रखते हैं. उनलोगों ने ऐसे लोगों के साथ बैठक करते हैं जिसका काम ही मौजूदा व्यवस्थाओं को धराशाई करना है. जहां खुद चुनाव जीतते हैं वहां ठीक है, हार जाएं तो सवाल. विपक्ष जब तक अपनी हार का ठीकरा दूसरों पर फोड़ता रहेगा तब तक नहीं जीतेगा. उन्हें जरूरत है खुद की गिरेबान में झांकने की कि क्या कारण है कि जनता उनके ऊपर विश्वास नहीं कर रही.

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