पटना(PATNA):बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को 70वीं बीपीएससी परीक्षा पास करने वाले 2000 अधिकारियों को नियुक्ति पत्र दिया. इसके साथ ही सीएम ने उन्हें अपनी जिम्मेदारियों को निभाने का भी संदेश दिया. अधिकारियों को उनकी जिम्मेदारी का एहसास कराते हुए समझाया कि यह नौकरी केवल और पैसे हासिल करने का माध्यम नहीं है, बल्कि प्रशासनिक सेवा की जिम्मेदारियों और जनता के प्रति जवाबदेही का एक अहम जरिया है. इसलिए सभी अधिकारी पूरी ईमानदारी और निर्भीक होकर, बिना किसी के दबाव में आए काम करें उन्होंने अधिकारियों से पूरी ईमानदारी, निर्भीकता और बिना किसी दबाव के काम करने की अपील की.
CM सम्राट बोले, आपकी एक साइन बदल सकती है कई परिवारों की जिंदगी...
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में 70वीं बीपीएससी के माध्यम से चयन का एक बड़ा रिकॉर्ड बना है. उन्होंने नवनियुक्त अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि उनके कंधों पर अब बड़ी जिम्मेदारी है. जिस फाइल पर वे हस्ताक्षर करेंगे, उसका सीधा असर किसी न किसी परिवार के जीवन पर पड़ेगा. इसलिए हर निर्णय लेते समय उन्हें यह समझना होगा कि उनके फैसले से आम लोगों के जीवन में क्या बदलाव आएगा.मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आप जिस भी फाइल पर साइन करेंगे, उससे किसी न किसी परिवार का भला हो सकता है. आपके जीवन में भी इस नौकरी के माध्यम से बदलाव आएगा, लेकिन उससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि आपके फैसलों से समाज और राज्य में कितना सकारात्मक बदलाव आता है.
अधिकारी को सिर्फ सरकारी प्रक्रिया पूरी करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए....
उन्होंने कहा कि प्रशासनिक पद पर रहते हुए अधिकारी को सिर्फ सरकारी प्रक्रिया पूरी करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए. आम लोगों की समस्याओं को समझना और उनका समाधान करना भी अधिकारी की जिम्मेदारी है. एक सही फैसला किसी जरूरतमंद परिवार को राहत दे सकता है, किसी युवा का भविष्य बना सकता है और किसी गांव की तस्वीर बदल सकता है.मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को ईमानदारी का महत्व समझाते हुए कहा कि बिहार की तरक्की सीधे तौर पर प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यशैली से जुड़ी है. उन्होंने कहा कि अधिकारी जितने ईमानदार और जिम्मेदार होकर काम करेंगे, बिहार उतनी ही तेजी से आगे बढ़ेगा.
बिना किसी दबाव की करें जनता की सेवा
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासनिक पद पर रहते हुए कई तरह के दबाव सामने आ सकते हैं. ऐसे में अधिकारियों को भयमुक्त होकर निर्णय लेने की क्षमता विकसित करनी होगी. उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि जनता के हित में सही निर्णय लेने के लिए अधिकारियों का स्वतंत्र और निष्पक्ष होना बेहद जरूरी है.उन्होंने कहा कि पद अपने साथ अधिकार जरूर देता है, लेकिन उसके साथ सेवा का भाव भी देता है. अधिकारी तभी बेहतर तरीके से सेवा कर पाएंगे, जब वे किसी दबाव में आए बिना कानून और जनहित के आधार पर निर्णय लेंगे.
अधिकारी हमेशा अपने अंदर रखे सेवा की भावना
अधिकारियों से कहा कि उन्हें अपने पद को लेकर अहंकार नहीं, बल्कि सेवा की भावना रखनी चाहिए. उन्होंने कहा कि अधिकारी जनता के सेवक हैं और उनकी प्राथमिकता आम लोगों की समस्याओं का समाधान होना चाहिए.उन्होंने कहा कि बिहार की उन्नति के लिए सरकार और प्रशासन को मिलकर काम करना होगा. इसके लिए जरूरी है कि अधिकारी गांव से लेकर शहर तक लोगों की समस्याओं को समझें और योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचाएं.कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री का संदेश साफ था कि सरकारी सेवा में आने के बाद अधिकारियों की असली परीक्षा उनके फैसलों और कार्यशैली से होगी. उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि वे अपने कार्यकाल को केवल नौकरी के रूप में न देखें, बल्कि इसे बिहार के भविष्य को बेहतर बनाने के अवसर के तौर पर लें.
