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बिहार के शिक्षकों को अब मौखिक या कागजी आवेदन से नहीं मिलेगी छुट्टी, शिक्षा विभाग ने शुरू की है नई प्रक्रिया

Manjesh Kumar Patna
Manjesh Kumar Patna
Senior News Publisher • TheNewsPost.in

पटना: बिहार में इन दिनों शिक्षा विभाग में लगातार नई नई चीजें लागू की जा रही है साथ ही विभाग को डिजिटल रूप देने के लिए भी लगातार काम किया जा रहा है. इसी कड़ी में अब शिक्षकों के छुट्टी लेने का तरीका भी बदल गया है. अब शिक्षकों को नए प्रक्रिया के अनुसार छुट्टी लेनी होगी, अगर वह ऐसा नहीं करते हैं तो फिर अनुपस्थित माने जाएंगे.

नए शिक्षकों को नहीं मिलेगा ईएल का लाभ

शिक्षा विभाग ने अनिवार्य कर दिया है कि शिक्षकों को छुट्टी लेने के लिए अब ई शिक्षकोष पोर्टल या मोबाइल एप के जरिए आवेदन करना होगा. अब मौखिक या कागजी आवेदन से छुट्टी नहीं मिलेगी. छुट्टी की नई प्रक्रिया में छुट्टी की मंजूरी के लिए समय सीमा भी तय की गई है ताकि शिक्षकों को लंबा इंतजार न करना पड़े. विभाग के अनुसार इस नई प्रक्रिया से छुट्टी की प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी साथ ही फर्जी हाजिरी पर भी रोक लगेगी. नई प्रक्रिया ने ईएल को लेकर भी नया प्रावधान किया गया है जिसके तहत नए शिक्षकों को पहले तीन वर्ष तक इसका लाभ नहीं मिलेगा. वहीं 11 महीने काम करने पर एक महीने का बिना वेतन अवकाश मिलने का प्रावधान है. इसके अलावा शिक्षक एक बार में अधिकतम दो महीने की छुट्टी के सकेंगे.

छुट्टी मंज़ूरी के लिए तय की गई समय सीमा

आकस्मिक और विशेष अवकाश के आवेदनों पर प्रधानाध्यापक या प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी उसी दिन निर्णय लेंगे. इससे शिक्षकों को छुट्टी की मंजूरी के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा. वहीं, मातृत्व अवकाश, शिशु देखभाल अवकाश और चिकित्सा अवकाश के आवेदन की प्रक्रिया अलग होगी. ऐसे आवेदन तीन कार्य दिवसों के भीतर जिला शिक्षा पदाधिकारी को भेजने होंगे. अब नई प्रक्रिया में छुट्टी की मंजूरी के लिए समय सीमा भी तय की गई है. अगर संबंधित अधिकारी तय समय सीमा में आवेदन को आगे नहीं बढ़ाएंगे तो वह स्वतः जिला शिक्षा पदाधिकारी के पास चला जाएगा. जिला शिक्षा पदाधिकारी को भी 7 दिनों के अंदर छुट्टी की आवेदन पर निर्णय लेना होगा.

शिक्षा मंत्री ने कहा छुट्टी की प्रक्रिया हुई है सरल

बिहार सेवा संहिता के नियम-152 के अनुसार, छुट्टी को अधिकार नहीं माना गया है. यानी निर्धारित प्रक्रिया के तहत अवकाश की मंजूरी लेना जरूरी है. बिना स्वीकृति के अनुपस्थित रहने पर शिक्षक का वेतन रोका जा सकता है. ऐसे मामलों में सेवा में टूट माने जाने की कार्रवाई भी हो सकती है. इसलिए शिक्षकों को छुट्टी पर जाने से पहले आवेदन और मंजूरी की स्थिति सुनिश्चित करनी होगी. शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के अनुसार, छुट्टी की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया गया है. अब सभी आवेदन पोर्टल के माध्यम से होंगे. इससे पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा और अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी. मामले में शिक्षा मंत्री ने कहा कि तय समय-सीमा का पालन नहीं करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी. नई व्यवस्था के जरिए छुट्टी के आवेदनों का समय पर निपटारा करने और स्कूलों में उपस्थिति व्यवस्था को बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है.

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