टीएनपी डेस्क (TNP DESK): बिहार विधान परिषद चुनाव के पहले बिहार में जनता दल (यूनाइटेड) में घमासान के बीच पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने अब मोर्चा संभाल लिया है. उन्होंने दावा किया है कि पार्टी में सब कुछ ठीक-ठाक है. नेताओं में कोई मतभेद नहीं है. ललन सिंह की नाराजगी की अटकलों को भी उन्होंने निराधार बताया है. उन्होंने कहा कि बाहुबली विधायक अनंत सिंह और पटना स्नातक सीट से एमएलसी नीरज कुमार के बीच का विवाद का हल बहुत जल्द निकाल लिया जाएगा. आनंद सिंह और नीरज कुमार दोनों एक दूसरे के खिलाफ मैदान में उतर गए है. अनंत सिंह ने शनिवार को कहा कि नीरज कुमार के कारण ही उन्हें जदयू छोड़नी पड़ी थी और मोकामा से निर्दलीय विधानसभा चुनाव लड़ना पड़ा था. फिर लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल में जाना पड़ा, जबकि उन्हें नीतीश कुमार से कोई परेशानी नहीं थी.
किसने अनंत सिंह को बेउर जेल का "संत" बताया
नीरज कुमार ने भी अनंत सिंह पर पलटवार किया. उन्होंने बगैर नाम लिए अनंत सिंह को बेउर जेल का "संत" बताया और आरोप लगाया कि वह अपराधियों और वारंटियों के साथ घूम रहे है. उनके आसपास बहुत सारे ऐसे लोग हैं. बिहार में कानून का राज है, अनंत सिंह अब उन्हें बचा नहीं पाएंगें. दरअसल, अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच के विवाद से नीतीश कुमार सहित पूरी पार्टी असहज है. दोनों में से कोई मानने को तैयार नहीं है. अनंत सिंह ने कहा है कि नीरज कुमार इस बार चुनाव नहीं जीत पाएंगे, दूसरी और नीरज कुमार का कहना है कि उनकी जीत निश्चित है. दोनों के बीच का विवाद कोई नया नहीं है. यह विवाद एक दशक से चला आ रहा है. अभी तक यह विवाद पर्दे के पीछे था, लेकिन अब पूरी तरह से सामने आ गया है.
बिहार में जदयू में उठे विवाद को लेकर जितनी मुंह, उतनी तरह की बातें
बिहार में जदयू में उठे विवाद को लेकर जितनी मुंह, उतनी तरह की बातें कही जा रही है. कुछ लोगों का मानना है कि नीतीश कुमार की सक्रियता कम होने से पार्टी में विरोध की आवाज उठने लगी है. पहले नीतीश कुमार ऐसे सभी आवाजों को चुप करा देते थे, लेकिन अब वह बात नहीं रही. दोनों के बीच विवाद की पटकथा 2015 में ही लिखी जानी शुरू हो गई थी. उस समय बिहार में महागठबंधन की सरकार थी और तेजस्वी यादव उपमुख्यमंत्री थे, जबकि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री थे. 24 जून 2015 को बाढ़ के पुटुस हत्याकांड में विधायक अनंत सिंह की गिरफ्तारी हुई थी. चर्चा यह चली कि इस गिरफ्तारी के जरिए अनंत सिंह के खिलाफ माहौल बनाया गया. नीतीश कुमार ने भी उस माहौल को स्वीकार कर लिया और नवंबर 2015 में जब विधानसभा का चुनाव हुआ, तो मोकामा सीट से अनंत सिंह को टिकट नहीं मिला.
एक समय अनंत सिंह की जगह नीरज कुमार को मोकामा से टिकट दे दिया गया था
उस समय नीरज कुमार को मोकामा से टिकट दे दिया गया. हालांकि अनंत सिंह जेल से ही निर्दलीय चुनाव लड़े और नीरज कुमार को लगभग 18,000 वोटो से हरा दिया. इस चुनाव के दौरान नीरज कुमार ने अनंत सिंह को एक अपराधी बताते हुए उनके खिलाफ माहौल तैयार किया था. 2025 में जदयू ने मोकामा से अनंत सिंह को चुनावी मैदान में उतारा, तब इसे केंद्रीय मंत्री ललन सिंह का प्रभाव माना गया. लोकसभा चुनाव में अनंत सिंह ने ललन सिंह को समर्थन किया था. लेकिन बात तब बिगड़ी जब नीरज कुमार को प्रचार करने के संदर्भ में जब पत्रकारों ने पूछा कि अनंत सिंह का प्रचार करने जाएंगे, तब उनका जवाब आया कि हम अपराधिक चरित्र वाले व्यक्ति के समर्थन में चुनाव प्रचार नहीं करेंगे, इस वक्तव्य से भी अनंत सिंह नाराज हुए. आरोप तो यह भी है कि जब अनंत सिंह का विवाद सोनू-मोनू गैंग से हुआ, तो नीरज कुमार कथित तौर पर सोनू-मोनू गैंग के साथ खड़े हो गए थे.
