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Bihar Politics:अभी न दिन तय हुआ है और न तिथि, फिर भी बिहार की बांकीपुर सीट क्यों हो गई है खास 

Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist

TNP DESK- बिहार का बांकीपुर एक ऐसा सीट हो गया है , जहां अभी उपचुनाव की तिथि की घोषणा नहीं हुई है.  चुनाव कब होगा, यह अभी तय नहीं हुआ है.  लेकिन पटना से लेकर दिल्ली की राजनीति बांकीपुर में आकर टिक गई है.  दरअसल, जन सुराज के  सूत्रधार प्रशांत किशोर ने बांकीपुर सीट  को हर हाल में जितने का दवा किया है, तो भाजपा ने भी इसे प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया है.  भाजपा ने प्रशांत किशोर को खुद मैदान में उतरने की चुनौती दी है.  

प्रशांत किशोर की घोषणा के बाद भाजपा हुई रेस 

प्रशांत किशोर का कहना है कि बांकीपुर सीट एनडीए के खिलाफ  जनमत संग्रह होगा।  नीतीश कुमार के बाद सम्राट चौधरी का निर्णय को जनता सही मानती है अथवा गलत, इसका भी पता बांकीपुर  चुनाव परिणाम से चलेगा।  दूसरी ओर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के इस्तीफा से खाली हुई यह  सीट  राजनीति का केंद्र बन गई है.  नितिन नवीन ने भी कई बार इस सीट से प्रतिनिधित्व किया है.  दो दिवसीय दौरे पर बिहार पहुंचे राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन   नवीन ने बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के मंडल अध्यक्षों के साथ मैराथन बैठक की है.  राज्यसभा सांसद बनने के बाद भाजपा अध्यक्ष ने बांकीपुर विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया है.  इस कारण बांकीपुर सीट  खाली हुई है.  उपचुनाव होना है. 

बांकीपुर सीट : भाजपा के लिए क्यों प्रतिष्ठा का प्रश्न
 
राष्ट्रीय अध्यक्ष की यह  परंपरागत सीट होने के कारण  भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल है.  उपचुनाव में जीत सुनिश्चित करने के लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने खुद मोर्चा संभाल लिया है.  भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर प्रशांत किशोर बांकीपुर  से चुनाव लड़ते हैं, तो उनका राजनीतिक अंत हो जाएगा।  इतने अंतर से चुनाव हारेंगे कि  फिर चुनाव लड़ने की हिम्मत नहीं जुटा पाएंगे।  दरअसल, जन सुराज  के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने बांकीपुर उपचुनाव में एनडीए सरकार के खिलाफ जनमत संग्रह बताया है.  उन्होंने भाजपा और सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा था कि जनता को नौकरी, भ्रष्टाचार और आर्थिक मदद के नाम पर भ्रमित किया गया है.

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