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Bihar Politics: एमएलसी चुनाव के बाद क्या जदयू, राजनीति चौराहे पर आकर खड़ी हो गई है, क्या हो सकता है आगे? पढिए

Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): बिहार में जदयू की राजनीति क्या चौराहे पर आकर खड़ी हो गई है? एमएलसी चुनाव क्या जदयू के लिए भारी पड़ गया है? एमएलसी चुनाव को लेकर जदयू के भीतर तो बखेड़ा था ही, अब भाजपा से भी मनमुटाव की खबरें आने लगी हैं. क्या भाजपा-जदयू के रिश्ते में खटास आ गया है? चुनाव के पहले बाहुबली विधायक अनंत सिंह और मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार के बीच चल रही खींचतान को लेकर पार्टी असहज थी. चुनाव परिणाम के बाद अनंत सिंह को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है. अनंत सिंह के खिलाफ राजनीतिक घेराबंदी तेज कर दी गई है, तो इधर निर्दलीय जीते राहुल राज और बंशीधर ब्रजबासी का भाजपा के साथ संबंध को लेकर भी नया बखेड़ा शुरू हो गया है. 

जदयू उम्मीदवारों को हराने वालो की पीठ पर किसका हाथ ?

दोनों ने भाजपा का समर्थन करने का ऐलान कर दिया है. दोनों के भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने में भले ही तकनीकी अड़चन हो, लेकिन दोनों भाजपा को समर्थन करने का ऐलान कर दिया है. तिरहुत स्नातक से लगातार दूसरी बार निर्दलीय विधान पार्षद बने बंशीधर ब्रजबासी तथा सारण शिक्षक सीट से पहली बार निर्दलीय एमएलसी बने राहुल राज शनिवार को भाजपा कार्यालय पहुंचे थे. उसके बाद तो कई तरह की बातें होनी शुरू हो गई. कहा तो यह भी जा रहा है कि दोनों ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली है, लेकिन सदस्यता ग्रहण करने की बात से दोनों ने इनकार किया है और समर्थन देने की बात कही है. दोनों ने जदयू  के उम्मीदवार को चुनाव में पराजित किया है और फिर भाजपा के साथ हो लिए हैं. 

सारण शिक्षक-तिरहुत स्नातक सीट से शुरू हो सकता है नया विवाद 

इससे जदयू में भी खुशफुसाहट होना स्वाभाविक था, जो शुरू हो गया है. आपको बता दें कि सारण शिक्षक से विधान पार्षद बने राहुल राज ने हाल ही में एनडीए से बगावत कर निर्दलीय नामांकन किया था. इसके बाद भाजपा ने उन्हें पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया था. एमएलसी चुनाव में उन्होंने एनडीए समर्थित जदयू प्रत्याशी आनंद पुष्कर को लगभग 1800 वोटो से पराजित किया. राहुल राज भाजपा के प्रदेश कार्य समिति सदस्य भी रह चुके हैं. इधर, तिरहुत स्नातक सीट पर बंशीधर ब्रजबासी ने एनडीए उम्मीदवार अभिषेक झा को हराया. अभिषेक लगातार दूसरी बार बंशीधर ब्रजबासी से चुनाव हारे. हार के बाद जदयू नेताओं में नाराजगी देखी जा रही है. सीतामढ़ी के जदयू सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने भी अभिषेक झा की हार  पर भाजपा नेताओं पर निशाना साधा है. कहा है कि कुछ एनडीए नेताओं का दिल साफ नहीं था. अब जब जदयू के दोनों उम्मीदवारों को हराने वाले राहुल राज और बंशीधर ब्रजबासी ने भाजपा को समर्थन देने की घोषणा कर दी है, तो सवाल खड़ा हुआ है कि क्या जदयू के उम्मीदवार किसी राजनितिक साजिश के शिकार तो नहीं हो गए हैं? 

क्या नीतीश कुमार की पकड़ पार्टी पर ढीली पड़ गई है ?

वैसे भी नीतीश कुमार की जैसे-जैसे पार्टी पर पकड़ ढीली पड़ती जा रही है, तरह-तरह की चर्चाएं होनी शुरू हो गई हैं. उल्लेखनीय है कि बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था. चुनाव परिणाम में बीजेपी ने तीन, जेडीयू ने एक, आरजेडी ने एक और जनसुराज ने एक सीट पर जीत दर्ज की. वहीं, दो सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने बाजी मारी. इस चुनाव में बीजेपी और जेडीयू ने चार-चार सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे. बीजेपी को तीन सीटों पर जीत मिली, जबकि जेडीयू चार में से केवल एक सीट ही जीत सकी. पार्टी को तीन सीटों पर हार का सामना करना पड़ा. इनमें दो सीटों पर बीजेपी के बागी निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत हुई. इसका सीधा असर जेडीयू के अधिकृत प्रत्याशियों पर पड़ा.हालांकि, बीजेपी को भी इस चुनाव में बड़ा झटका लगा. पटना शिक्षक सीट से पांच बार के विधान पार्षद नवल किशोर यादव चुनाव हार गये. उन्हें आरजेडी के डॉ. संजीव कुमार ने शिकस्त दी.