Bihar

Bihar Politics: नीतीश कुमार के अति पिछड़े वोट बैंक पर अब भाजपा की नजर, जानिए क्या है खेल

Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist
Bihar Politics: नीतीश कुमार के अति पिछड़े वोट बैंक पर अब भाजपा की नजर, जानिए क्या है खेल

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): अति पिछड़ा वर्ग की राजनीति की बदौलत नीतीश कुमार 20 वर्षों तक बिहार के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज रहे. लेकिन अब इस वोट बैंक पर भाजपा की नजर पड़ी है. बिहार में अति पिछड़ा वर्ग की आबादी लगभग 36% है. राज्य का सबसे बड़ा वोट बैंक होने की वजह से सभी राजनीतिक दलों की नजर इस वोट बैंक पर रहती है. इसी वोट बैंक को नीतीश कुमार ने अपनी ताकत बनाया था. अब 22 जून को भाजपा पटना में अति पिछड़ा सम्मेलन का आयोजन करने जा रही है. अभिनंदन सह आभार सम्मलेन में अति पिछड़ा समाज के नवनिर्वाचित सभी विधान परिषद सदस्यों का अभिनंदन किया जाएगा.  

भाजपा के दिग्गज रहेंगें कार्यक्रम में शामिल

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्य शामिल रहेंगे. बिहार के मंत्री डॉ प्रमोद कुमार ने इसकी जानकारी दी है. उन्होंने कहा कि अति पिछड़ा समाज संख्या बल में मजबूत है. जब समाज संगठित होकर एक मंच पर आएगा, तभी उसकी आवाज मजबूत  हो सकती है.  चर्चा तेज है कि सम्मेलन के माध्यम से बीजेपी बिहार की अति पिछड़ा आबादी पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है. उल्लेखनीय है कि इसी वोट बैंक को साध कर नीतीश कुमार बिहार पर 20 वर्षों तक शासन किया. लालू प्रसाद यादव की राजनीति को ध्वस्त किया. लेकिन अब हालात बदल गए हैं.  

जदयू को बचा कर रखना, हो सकती है चुनौती 

नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री नहीं है, लेकिन जदयू के वह राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. अभी वह राज्यसभा के सदस्य हैं. मुख्यमंत्री की कुर्सी उन्होंने भाजपा को सौंप दी है, लेकिन बिहार की राजनीति से वह अलग नहीं हो पाए है. ऐसे में माना जा रहा है कि अति पिछड़ा वर्ग अभी भी नीतीश कुमार का वोट बैंक है और इसमें सेंध लगाने के लिए भाजपा लगातार कोशिश कर रही है. बिहार में पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री बना है. इसलिए भाजपा अब अपना वोट बैंक बढ़ाने की कोशिश में है. भाजपा को मालूम है कि अति पिछड़ा वोट बैंक को साढ़े बिना बिहार की राजनीति थोड़ी कठिन है. लेकिन इसी वोट बैंक पर नीतीश कुमार की भी राजनीति चलती है, तो आगे क्या होगा. 

अति पिछड़े वोट बैंक पर हर पार्टियों की नजर 

इसी 36 पर्सेंट वोट बैंक पर भाजपा और नीतीश कुमार दोनों अपनी राजनीति करने की तैयारी कर रहे हैं. नीतीश कुमार बिहार के ऐसे नेता हैं , जिनके इर्द- गिर्द सत्ता घूमती रही. 2000 में वह 7 दिनों के लिए पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने, लेकिन 2005 के बाद उनके मुख्यमंत्री बनने का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह 2026 तक चला. गठबंधन किसी के साथ रहा हो, पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही रहे. हालांकि कुछ महीनो के लिए जीतन राम मांझी भी बिहार के मुख्यमंत्री इस बीच बने थे. नीतीश कुमार तो अब चारों  सदनों के सदस्य  बन चुके हैं, लेकिन बिहार की राजनीति से अपने को अलग नहीं कर पाएंगे.