Bihar

बिहार विधान परिषद चुनाव: एनडीए में शामिल दलों को लेकर भाजपा की क्यों होगी बड़ी परीक्षा, क्या होगा गणित

Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist
बिहार विधान परिषद चुनाव: एनडीए में शामिल दलों को लेकर भाजपा की क्यों होगी बड़ी परीक्षा, क्या होगा गणित

TNP DESK- बिहार में एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मी तेज है.  पटना से लेकर दिल्ली तक बैठक हो रही है.  जदयू भी उम्मीदवारों पर मंथन कर रहा है, तो भाजपा भी संभावित नाम की सूची केंद्रीय नेतृत्व को सौंप दी है.  दरअसल, बिहार विधान परिषद की 10 सीट  इसलिए महत्वपूर्ण हो गई है कि एनडीए के भीतर अपनी ताकत, हिस्सेदारी और राजनीतिक प्रभाव की भी परीक्षा होने वाली है.  यह बात तो तय है कि स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार और पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को विधान परिषद में भेजा जाएगा।  स्वास्थ्य मंत्री को जदयू  अपने कोटे से टिकट देगा तो दीपक प्रकाश को भाजपा टिकट दे सकती है.  

एनडीए के लिए अपने सहयोगी दलों को संतुष्ट रखना बड़ी चुनौती होगी

एनडीए के लिए अपने सहयोगी दलों को संतुष्ट रखना बड़ी चुनौती होगी. भाजपा के अंदर भी कई लोग टिकट के दावेदार है.  ऐसे में सहयोगी दलों की मांग को पूरा करना बहुत आसान नहीं होगा. जीतन राम मांझी भी एक सीट की मांग कर चुके है.  उनका कहना है कि महादलित समाज में उनकी पकड़ मजबूत है और इसलिए एनडीए को इसका राजनीतिक लाभ मिलता है.  इसलिए उनकी पार्टी को विधान परिषद में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।  चिराग पासवान की पार्टी भी चाहती है कि उन्हें सम्मानजनक हिस्सेदारी मिलनी चाहिए.  वह सार्वजनिक तौर पर तो बहुत कुछ नहीं बोल रहे हैं, लेकिन भीतर ही भीतर दबाव बना रहे है.    

उपेंद्र कुशवाहा भी अपनी पार्टी के लिए प्रतिनिधित्व चाहते है

उपेंद्र कुशवाहा भी अपनी पार्टी के लिए प्रतिनिधित्व चाहते है.  उनका मानना है कि कुशवाहा समाज में उनकी राजनीतिक पकड़  मजबूत है.  इसलिए वह  एनडीए में अपनी  हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहे है .  जदयू भी अपने नेताओं को एडजस्ट करना चाहती है.  दरअसल, एनडीए में सभी दल अपनी ताकत दिखाना चाहते है.  वह सीट से कंप्रोमाइज इसलिए भी नहीं करना चाहते हैं कि आगे उन्हें परेशानी हो सकती है.  जीतन राम मांझी राज्यसभा चुनाव के समय भी अपनी दावेदारी की थी और नाराजगी व्यक्त की थी.  उन्हें मनाने की कोशिश हुई थी.  

भाजपा की चुनौती-एक को सीट मिलती है तो दूसरा होगा नाराज 

भाजपा के सामने यह  बड़ी चुनौती है कि किसी एक दल को अगर महत्व देती है, तो दूसरा नाराज हो जाएगा. अगर माझी को सीट मिलती है तो चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा की दावेदारी भी मजबूत होगी. अगर चिराग पासवान को अधिक सीट मिली तो दूसरे दल नाराज हो सकते है,  इसलिए भी जदयू और भाजपा कदम उठा रही है.  एनडीए चाहता है कि गठबंधन पूरी तरह से एकजुट दिखे. इतना तो कहा ही जा सकता है कि   विधान परिषद चुनाव एनडीए के लिए विपक्ष से अधिक अपनी अंदरूनी राजनीति की परीक्षा लेगी.