Bihar

बिहार : "आवास की राजनीति" की चपेट में कैसे आ गया मुख्यमंत्री का भी आवास, अब आगे क्या होगा 

Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist

TNP DESK- बिहार में शुरू हुई "आवास की राजनीति" की चपेट में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का आवास भी आ गया है.  राज्य सरकार ने अपने पहले के आदेश को वापस ले लिया है.  बता दें कि मुख्यमंत्री आवास को पांच देश रत्न मार्ग तक बढ़ाने के आदेश को वापस ले लिया गया है.  पहले मुख्यमंत्री आवास को पांच देश रत्न मार्ग तक बढ़ाने का आदेश राज्य सरकार ने दिया था.  दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री रावड़ी देवी के 10 सर्कुलर रोड बंगला  को भारतीय जनता पार्टी के मंत्री नंदकिशोर राम को आवंटित किया गया है.  इसके बाद राज्य सरकार ने रावड़ी देवी को 39 हार्डिंग रोड बंगले में जाने को कहा है.  इस आदेश के निकलने के बाद राजद  ने मुख्यमंत्री आवास में पांच देशरत्न  मार्ग बंगला मिलाकर  15 एकड़ का आवास बनाने पर सवाल उठाया था. 
 
जनसुराज  के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने भी उठाया था सवाल 

 जनसुराज  के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने भी इस पर सवाल उठाया था.  सूत्र बता रहे हैं कि भवन निर्माण विभाग ने गुरुवार को मुख्यमंत्री आवास के विस्तार का आदेश वापस ले लिया है.  अब पांच देशरत्न  मार्ग वाला बंगला  मुख्यमंत्री आवास का हिस्सा नहीं रहेगा।  राष्ट्रीय जनता दल ने इस मुद्दे को पकड़ लिया था.   राजद  प्रवक्ता ने कहा है कि राज्य सरकार को लगा कि कहीं उसकी भद  न पीट  जाए, इसलिए अपने पूर्व के आदेश को वापस ले लिया है.  पांच देशरत्न  मार्ग में तेजस्वी यादव और सम्राट चौधरी उपमुख्यमंत्री के रूप में रह चुके हैं.  

आवास का विवाद  बिहार में बड़ा हो गया है,अब आगे क्या 

दरअसल, आवास का विवाद  बिहार में बड़ा हो गया है.  पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने कहा है कि वह आवास खाली नहीं करेंगी।  मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अभी हाल ही में कहा था कि अगर पार्टी उन्हें कह देगी कि उनका काम पूरा हो गया है, तो वह 24 घंटे के अंदर बंगला खाली करके चल देंगें।  उन्होंने बंगला  नहीं खाली करने पर राबड़ी देवी पर  भी तंज भी कसा   था.  उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का उदाहरण भी दिया था.  खैर मामला बढ़ने के पहले ही सरकार ने अपना आदेश वापस ले लिया है.  मुख्यमंत्री ने यह भी  कहा था कि मां को अलग आवास  चाहिए, पिता को अलग आवास  चाहिए, बेटों को अलग आवास  चाहिए।  मुख्यमंत्री के इस कथन पर सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाली लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी.  

लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य ने क्या दी है प्रतिक्रिया 

उन्होंने सोशल मीडिया एक्स  पर कहा था कि अगर एक परिवार के दस सदस्य जनप्रतिनिधि होंगे , तो दसों सुरक्षा व् आवास के हक़दार हैं ..दिमागी दिवालियापन की कगार पर पहुँच चुके बिहार के मुख्यमंत्री को इस बात का ज्ञान नहीं है कि हरके चुने गए विधानसभा - विधान परिषद के सदस्य को आवास व् सुरक्षा मुहैय्या कराना सरकार का दायित्व होता और हरेक निर्वाचित जनप्रतिनिधि का अधिकार भी होता है .. सुरक्षा व् आवास रिश्तेदारी एवं प्रति परिवार के हिसाब से नहीं प्रदान की जाती है .."अगर एक परिवार के दस सदस्य जनप्रतिनिधि होंगे , तो दसों सुरक्षा व् आवास के हक़दार होंगे" ये तो एक आम आदमी भी जानता है , मगर हाफीडिविट के माध्यम से अपनी बुद्धि बेच चुके बिहार के मुख्यमंत्री को नहीं मालूम है .. बिना बुद्धि के मुख्यमंत्री को अपने बयान के संदर्भ में ये भी बताना चाहिए कि उनकी ही सरकार ने उनके आका , हमारे पल्टू चाचा जी और उनके बेटे को कैसे अलग आवास , अलग सुरक्षा प्रदान कर रखा है ?

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