टीएनपी डेस्क: कभी बिहार की बांकीपुर से भाजपा की एकतरफा जीत होती थी. लेकिन आज यह पलटती दिख रही है. हालांकि अंतिम परिणाम की घोषणा अभी नहीं हुई है. लेकिन भाजपा का यह मजबूत गढ़ ढहता दिख रहा है. उपचुनाव की मतगणना जारी है, लेकिन जनसुराज ने भाजपा को दबाव में लाकर खड़ा कर दिया है. भाजपा को सिर्फ एक राउंड में बढ़त मिली है. वह भी 17 वोट की. लेकिन उसके बाद और उसके पहले जनसुराज लगातार बढ़त बनाए हुए रहा. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को 2025 के चुनाव में लगभग 63% वोट मिले थे, 2020 में लगभग 59 पर्सेंट वोट मिले थे, 2015 में 60% और 2010 में 72% वोट मिले थे. बांकीपुर के चुनाव में भाजपा की एकतरफा जीत होती थी. लेकिन प्रशांत किशोर ने इस मिथक को लगभग तोड़ दिया है.
प्रशांत किशोर बांकीपुर के मतदाताओं को यह समझाने में सफल होते दिख रहे हैं कि भाजपा के लोग कहते हैं कि- कुत्ता, बिल्ली को भी लड़ा देंगे तो जीत जाएगा। भाजपा ने एक साधारण कार्यकर्ता को टिकट दिया, तो प्रशांत किशोर ने उसे भी इनकैश की कोशिश की. यह बात भी सच है कि माहौल का भी प्रशांत किशोर को लाभ मिला है. देश की राजनीति में पेपर लीक के विरोध में छात्र आंदोलन, पटना में लाठीचार्ज,सिवान में एके -47 से फायरिंग के मामले को भी उठाया। अपने कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के आरोप में प्रशांत किशोर ने थाने में मोर्चा संभाला। उस रात जो आक्रमक छवि लोगों ने देखी, उसका भी प्रभाव लोगों में पड़ा होगा। यह अलग बात है कि मजबूत रणनीति के साथ प्रशांत किशोर आगे बढ़े, एक तरफ उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को टारगेट किया तो भाजपा के बड़े नेताओं को भी नहीं छोड़ा।
वह हर सभा में कहते रहे कि अगर यहां से आप लोगों ने भाजपा को हरा दिया ,तो नीतीश कुमार के नाम पर वोट लेकर सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाने वालों को बहुत बड़ा सबक मिलेगा। सम्राट चौधरी की सरकार को बिहार के लोग किस नजरिए से देख रहे हैं, इसका भी परिणाम बांकीपुर का रिजल्ट बतायेगा। प्रशांत किशोर इस बात को भी खूब उछाला कि बांकीपुर के नतीजे की गूंज दिल्ली के भाजपा नेतृत्व को सुनाई देगी और उसका अहंकार टूटेगा। अभी तो मतगणना चल रही है, लेकिन प्रशांत किशोर भाजपा पर भारी पड़ते दिख रहे हैं. बांकीपुर का चुनाव परिणाम बिहार की राजनीति के लिए एक निर्णायक मोड़ भी साबित हो सकता है.
कुल मिलाकर कहा जाए तो बांकीपुर से अगर प्रशांत किशोर की विजय होती है ,तो बिहार की राजनीति में उलट फेर हो सकता है. बांकीपुर के चुनाव में तेजस्वी यादव के रोड शो के बावजूद राजद कहीं मजबूत नहीं दिखा। बांकीपुर के चुनाव परिणाम को जानने के लिए सिर्फ देश ही नहीं ,बल्कि विदेश के बिहारी लोग भी परेशान हिन्। वह भी जानना चाहते हैं कि बिहार का बांकेपुर आखिर क्या करने जा रहा है? यहां यह उल्लेखनीय है कि बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट एक ऐसी सीट है, जहां भाजपा के बड़े-बड़े नेताओं के अलावे पूर्व मुख्यमंत्री के भी आवास हैं. बांकीपुर विधानसभा सीट बिहार को दो मुख्यमंत्री भी दिया है. केबी सहाय और महामाया बाबू यही से जीत कर मुख्यमंत्री बने थे. यह बात अलग है कि उस समय इस सीट का नाम बांकीपुर नहीं था.
