TNP DESK-: बिहार में एनडीए नेताओं के सुर क्या बदलने लगे हैं? एस आई आर को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेद का खुलासा होने के बाद ऐसा हो रहा है. विपक्ष ने तो मोर्चा खोल ही दिया है. अब बिहार में सत्ताधारी गठबंधन एनडीए के नेता भी ज्ञानेश कुमार से सफाई की मांग करने लगे हैं. पहले केंद्रीय मंत्री और लोजपा सुप्रीमो चिराग पासवान ने आयोग से शंका दूर करने को कहा, तो अब बिहार में भाजपा के सहयोगी दल राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने भी कहा है कि इस मामले पर तुरंत स्पष्टीकरण आना चाहिए।
उपेंद्र कुशवाहा ने सोशल मीडिया पर क्या कहा है
उपेंद्र कुशवाहा ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा है कि एसआईआर से संबंधित विवाद पर जनता में काफी उलझन की स्थिति पैदा हो गई है. इस विषय को एड्रेस करने की जरूरत है, कंफ्यूजन दूर करने के लिए चुनाव आयोग के द्वारा अविलंब सही स्थिति पर स्पष्टीकरण आना चाहिए। इससे पहले लोजपा नेता और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि वह सरकार का हिस्सा होने के नाते किसी संवैधानिक संस्था का बचाव नहीं करना चाहते। अगर जनता का चुनावी व्यवस्था से भरोसा उठने लगे, तो यह लोकतंत्र के लिए सही नहीं होगा। चिराग पासवान ने कहा कि इसलिए चुनाव आयोग को और अधिक मजबूती से अपना स्पष्टीकरण सबके सामने रखना चाहिए। जनता के मन में जो शंकाएं पैदा हुई है, उसे दूर करना चाहिए।
क्यों उठाई जा रही बिहार ,बंगाल में फिर से चुनाव कराने की मांग?
इधर, विपक्ष लगातार हमलावर है. खुलासा होने के बाद कह रहा है कि चुनाव आयोग ने एस आई आर का उपयोग भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए किया था. पश्चिम बंगाल, बिहार जैसे राज्यों में विपक्षी नेताओं की ओर से फिर से चुनाव कराने की मांग की जा रही है. हालांकि भाजपा नेता इस मामले में चुनाव आयोग का बचाव कर रहे है. कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग को लेकर देशभर में धरना -प्रदर्शन किया। पटना में भी मार्च निकाला गया, पुलिस को वाटर कैनन का उपयोग करना पड़ा. राजद ने भी शुक्रवार को संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के नाम पर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ बिहार के सभी जिला मुख्यालय में प्रदर्शन किया और पुतला दहन किया। बता दें कि एस आई आर की प्रक्रिया और चुनाव आयोग के खिलाफ झारखंड में भी घमासान चल रहा है. झारखंड के जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किये जा रहे हैं. झारखंड में झामुमो और कांग्रेस का आरोप है कि एसआईआर के जरिए चुनिंदा मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं. नेता निष्पक्षता पर सवाल कर रहे हैं. यह अलग बात है कि झारखंड में भी भाजपा एसआईआर प्रक्रिया का समर्थन कर रही है.
