हाजीपुर (HAZIPUR: बिहार में बाढ़ से प्रभावित इलाकों में राहत व्यवस्था को लेकर पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने वैशाली जिला प्रशासन और राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं. पप्पू यादव अचानक हाजीपुर में महात्मा गांधी सेतु के पास पुराने टोल प्लाजा परिसर में संचालित मुख्यमंत्री बाढ़ राहत शिविर पहुंचे. यहां उन्होंने कैंप में रह रहे लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याएं जानीं और भोजन सहित अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया.
खाने को चखने के बाद जताई नाराजगी
निरीक्षण के दौरान पप्पू यादव ने शिविर में बाढ़ पीड़ितों के लिए तैयार भोजन को खुद चखकर उसकी गुणवत्ता जांची. इसके बाद उन्होंने खाने की स्थिति पर नाराजगी जाहिर की. सांसद ने आरोप लगाया कि कैंप में लोगों को जली हुई दाल, ठीक से नहीं पके चने की सब्जी और अधपका चावल दिया जा रहा है. उन्होंने सवाल उठाया कि संकट के समय राहत शिविर में रहने वाले लोगों को इस तरह का भोजन कैसे परोसा जा सकता है.
बाढ़ पीड़ितों ने सुनाईं अपनी समस्याएं
शिविर में मौजूद कई लोगों ने सांसद के सामने राहत व्यवस्था को लेकर शिकायतें रखीं. पीड़ितों का आरोप था कि अधिकारियों या जनप्रतिनिधियों के दौरे के समय सुविधाओं को बेहतर दिखाने की कोशिश की जाती है, लेकिन बाद में स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है. लोगों ने भोजन और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को लेकर प्रशासन से बेहतर व्यवस्था की मांग की.
पीड़ितों को दी आर्थिक सहायता
पप्पू यादव ने कैंप में जरूरतमंद लोगों को आर्थिक सहायता भी दी. उन्होंने कई बाढ़ पीड़ितों को पांच-पांच सौ रुपये नकद दिए और महिलाओं के बीच सैनिटरी पैड वितरित किए. सांसद ने प्रभावित परिवारों से उनकी जरूरतों के बारे में जानकारी भी ली. हाजीपुर के राहत शिविर से निकलने के बाद पप्पू यादव राघोपुर विधानसभा क्षेत्र के तेरसिया गांव पहुंचे. यहां उन्होंने बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया और लोगों के बीच राहत पहुंचाई. इस दौरान सांसद ने खुद पूरियां तैयार करने में हाथ बंटाया और उन्हें पीड़ितों के बीच परोसा. उन्होंने प्रभावित लोगों के साथ रात भी बिताई.
सरकार और प्रशासन पर साधा निशाना
मीडिया से बातचीत में पप्पू यादव ने राज्य सरकार और वैशाली जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि राहत व्यवस्था कागजों और दिखावे तक सीमित है, जबकि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को जमीनी स्तर पर कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
