मुजफ्फरपुर (MUZAFFARPUR): जिले के अहियापुर थाना क्षेत्र के झपहां-उदानडीह में चहारदीवारी और मकानों में तोड़फोड़ के मामले में पुलिस की कार्रवाई लगातार तेज हो रही है. इस पूरे प्रकरण में अब तक 28 प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हैं, जबकि सात आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है. रविवार को एसडीपीओ टाउन-2 विनीता सिन्हा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मामले की जानकारी दी. पुलिस के अनुसार, स्कॉर्पियो, थार, जेसीबी और मोटरसाइकिल से पहुंचे लोगों पर पहले से निर्मित चहारदीवारी और मकानों में तोड़फोड़ करने का आरोप है. पीड़ितों की शिकायत पर शुरुआती दौर में 22 मामले दर्ज किए गए थे, जिसके बाद जांच और छापेमारी के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर छह और प्राथमिकी दर्ज की गईं. मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है और पुलिस अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच कर रही है.
इसी बीच ब्रह्मपुरा और अहियापुर थाना क्षेत्रों में जमीन विवाद से जुड़े दो नए मामले भी दर्ज किए गए हैं. ब्रह्मपुरा में एक महिला ने आरोप लगाया कि कोल्हुआ पैगंबरपुर स्थित उनकी और उनके पति की जमीन के दस्तावेजों में कथित हेरफेर कर 35 लाख रुपये का बिक्री दस्तावेज तैयार किया गया, जबकि उन्हें कोई भुगतान नहीं मिला. मामले में राहुल ठाकुर, उज्ज्वल कुमार पांडेय, कार्तिक कुमार, बेलसंड विधायक अमित कुमार रानू और उनके भाई सोनू कुमार उर्फ अभिनव को नामजद किया गया है. वहीं, शाहबाजपुर में करीब 70 डिसमिल पुश्तैनी जमीन के कथित फर्जी दाखिल-खारिज को लेकर विजय कुमार ने शिकायत दर्ज कराई है. पुलिस इन मामलों में दस्तावेजों और जमीन की रजिस्ट्री से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है.
तोड़फोड़ की घटना में इस्तेमाल जेसीबी के मालिक सुबोध राय को भी पुलिस ने लश्करीपुर से गिरफ्तार किया है. पूछताछ में उसके द्वारा 20 अगस्त को अमित सिंह नामक व्यक्ति को 4,500 रुपये में जेसीबी किराये पर देने की जानकारी सामने आई है. पुलिस के मुताबिक, घटना के दौरान सुबोध राय मौके पर मौजूद था. इस मामले में अब तक गिरफ्तार सात लोगों में नन्हे सिंह, छोटू यादव, सुमित कुमार श्रीवास्तव, सनी सिंह, आनंद कुमार, विकास राठौड़ और सुबोध राय शामिल हैं. सभी मामलों में एसआईटी आगे की जांच कर रही है. पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर अन्य आरोपितों की गिरफ्तारी की जाएगी और जरूरत पड़ने पर कानूनी प्रावधानों के तहत संपत्ति जब्ती की कार्रवाई भी हो सकती है. हालांकि, लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी.
