Bihar News: बिहार में सहकारी समितियों के जरिए दूध बेचने वाले पशुपालकों के लिए भुगतान की प्रक्रिया अब आसान होने वाली है. कॉम्फेड दूध उत्पादकों को उनकी बिक्री की रकम सीधे बैंक खाते में भेजने की नई व्यवस्था लागू करने जा रहा है. डायरेक्ट अकाउंट ट्रांसफर (DAT) व्यवस्था के शुरू होने से उत्पादकों को भुगतान मिलने में होने वाली देरी कम होगी. साथ ही पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने में भी मदद मिलेगी.
पहले चरण में 50 हजार दूध उत्पादकों को लाभ
नई व्यवस्था को एक साथ पूरे राज्य में लागू करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा. पहले चरण में इस महीने के अंत तक करीब 5 हजार दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों से जुड़े लगभग 50 हजार उत्पादकों के बैंक खातों में सीधे भुगतान भेजने की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है. इसके बाद इसका दायरा बढ़ाया जाएगा. राज्य में कुल 22,416 दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों से जुड़े 7 लाख से अधिक दूध उत्पादकों को धीरे-धीरे डायरेक्ट भुगतान प्रणाली से जोड़ने की योजना है.
सहकारी समितियां उपलब्ध कराएंगी बैंक खाते की जानकारी
अभी दूध की बिक्री का भुगतान प्राथमिक दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों के माध्यम से किया जाता है. नई व्यवस्था में राशि सीधे संबंधित उत्पादक के बैंक खाते में पहुंचेगी. इसके लिए प्राथमिक समितियां दूध विक्रेताओं की सूची और उनके बैंक खाते से जुड़ी जरूरी जानकारी संबंधित दुग्ध संघों को उपलब्ध कराएंगी. कॉम्फेड के अंतर्गत बिहार में आठ प्रमुख दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ काम कर रहे हैं. इनमें पटना का वैशाली पाटलिपुत्र, बरौनी का राजेंद्र प्रसाद, मुजफ्फरपुर का तिरहुत, समस्तीपुर का मिथिला, आरा का शाहाबाद, भागलपुर का विक्रमशिला, गया का मगध और सुपौल का कोशी दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ शामिल है. इन संघों से सात लाख से अधिक दूध उत्पादक जुड़े हैं, जो नियमित रूप से दूध की आपूर्ति करते हैं.
सुधा के उत्पादों में इस्तेमाल होता है दूध
कॉम्फेड द्वारा एकत्र किए गए दूध से सुधा ब्रांड के तहत पाउच दूध के साथ दही, पनीर, आइसक्रीम और मिल्क पाउडर समेत कई उत्पाद तैयार किए जाते हैं. कुल संग्रहित दूध का करीब 70 प्रतिशत पाउच वाले दूध के रूप में बेचा जाता है, जबकि शेष का उपयोग दूसरे डेयरी उत्पाद बनाने में होता है. कॉम्फेड के एमडी कपिल अशोक के अनुसार, डायरेक्ट अकाउंट ट्रांसफर व्यवस्था का उद्देश्य दूध उत्पादकों को समय पर और सीधे भुगतान उपलब्ध कराना है. नई प्रणाली पूरी तरह लागू होने के बाद लाखों पशुपालकों को भुगतान के लिए बीच की प्रक्रिया पर निर्भरता कम होगी.
