Bihar

शाबाश बेटा ! भगवान ने नहीं दिए दोनों हाथ, लेकिन नहीं हारी हिम्मत, देखिए कैसे पैरों से लिख रही किस्मत

Priyanka Kumari CE
Priyanka Kumari CE
Sr. Content Writer

कटिहार(KATIHAR):कहा जाता है कि हौसला हाथ पैर, धन-दौलत और सुविधाओं से नहीं आता, बल्कि हौसला आपके आत्मविश्वास से आता है. इस बात को बिहार की एक बेटी ने सच कर दिखाया है.आज के दौर में जहां लोग हाथ पैर रहते हुए कई तरह के बहाने बनाकर आगे नहीं बढ़ते, वहीं इस छोटी सी बच्ची ने लोगों को बताया है कि कैसे हौसलों से उड़ान भरी जाती है.इस बच्ची का नाम लक्ष्मी है, जो बिहार के कटिहार जिले की रहने वाली है. इसके दोनों हाथ नहीं हैं, लेकिन फिर भी पैर से कॉपी में शब्दों को उतारती है. जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है और लाखों लोगों को प्रेरणा दे रहा है, जो किसी न किसी वजह को बताकर आगे बढ़ने से कतराते हैं.

पढ़िए कैसे पैरो से लिखती हैं किस्मत

पूरा मामला कटिहार के हसनगंज प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय भतौरिया का है, जहां कक्षा चार की छात्रा लक्ष्मी, जो जन्म से ही दिव्यांग है और जिसके दोनों हाथ नहीं हैं, अपने पैर से अपनी किस्मत लिखने की कोशिश कर रही है. लक्ष्मी आगे पढ़-लिखकर शिक्षिका बनना चाहती है.जिंदगी की हर दिन चुनौती के बीच मजदूरी कर तीन बेटियों और एक बेटे की परवरिश करने वाले लक्ष्मी के मां और पिताजी के हिम्मत की भी तारीफ करनी पड़ेगी.सुदूर इलाके में इस बच्ची के जन्म के बाद ही कुछ लोगों ने बच्ची को फेंक देने की सलाह दी थी, मगर मां-पिता ने प्यार से उसका नाम लक्ष्मी रख दिया और खुद अनपढ़ होने के बावजूद अपनी इस दिव्यांग बच्ची को रोजाना विद्यालय तक लाकर अक्षर ज्ञान के सहारे लक्ष्मी की किस्मत बदलने की उम्मीद कर रहे हैं.पेशे से मजदूर पिता रामदेव यादव और गृहणी रेणु देवी हैं.

अब तक नहीं मिला है किसी सरकारी योजना का लाभ

जन्म से ही दिव्यांग लक्ष्मी को अब तक कोई सरकारी सहारा नहीं मिलने से लक्ष्मी की मां को कुछ मलाल तो है, मगर विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं जिस तरह से लक्ष्मी के साथ खड़े हैं और हमेशा लक्ष्मी के विशेष सहयोग के लिए तत्पर रहते हैं, वह भी तारीफ के काबिल है.कुल मिलाकर लक्ष्मी बिहार की, खासकर उन बच्चियों और वैसे परिवारों के लिए एक बड़ा उदाहरण है, जो छोटी-छोटी वजहों या किसी भी बहाने से अपने बच्चों, खासकर बेटियों को शिक्षा से महरूम रख देते हैं. फिलहाल लक्ष्मी पढ़ना चाहती है और आगे चलकर शिक्षिका बनना चाहती है.

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