TNP DESK- बिहार के कटिहार जिले के को ढ़ा प्रखंड में एक बस्ती है जुराबगंज, इस बस्ती की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है. क्या कभी कोई सोच सकता है कि इस युग में भी कोई ऐसी बस्ती होगी, जहां हर घर से एक क्रिमिनल निकलता होगा? जहां बच्चों के जन्म के साथ ही उसे अपराधी बनने के गुर सिखाए जाते होंगे? हर महीने जहां लगती होगी खौफनाक पंचायत, जिसमें लोगों को लूटपाट कैसे करना है, इस पर चर्चा की जाती होगी? इस गांव को अब अपराधी बनाने की फैक्ट्री कहा जाए, तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी. इस बस्ती से निकले अपराधी पूरे देश में फैल चुके हैं और लगातार अपराध की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं.
रांची में हुआ एनकाउंटर तो चर्चा हुई तेज
दो दिन पहले झारखंड के रांची में पुलिस के साथ एनकाउंटर में इसी गैंग का एक अपराधी घायल हो गया. पुलिस ने दो दिन पहले को ढ़ा गैंग के तीन कथित अपराधियों को पकड़ा है. पुलिस को कई जानकारियां दी हैं. यह गैंग चोरी की बाइक अथवा चोरी की कार से अपराध की घटना को अंजाम देता है. बहुत अदब से ही नमस्ते -प्रणाम करते हुए "शिकार" तक पहुंचता है और फिर गले की चेन, बैग , सामान लेकर रफ्फूचक्कर हो जाता है. ट्रेन में भी इस गिरोह की सक्रियता कम नहीं है. उनकी ट्रेनिंग इतनी पक्की होती है कि जल्द पकड़ में नहीं आते. बिहार, झारखंड की बात कौन कहे, महाराष्ट्र तक इनका दल फैला हुआ है. इनका कोई स्थाई ठिकाना नहीं होता, किसी भी परिस्थिति में यह अपने को ढाल लेते हैं और अपराध करने के बाद निकल भागते हैं. पुलिस पानी पीटती रह जाती है. बिहार के जिस बस्ती के यह अपराधी रहने वाले हैं, उसकी कहानी हैरान करने वाली है.
राजस्थान से आकर बसे हैं बिहार के कटिहार में
जानकार बताते हैं कि बहुत दिन पहले राजस्थान में रहने वाले किचट जनजाति के लोग कटिहार के को ढ़ा में आकर बस गए. यह गरीब थे, अपनी जरूरत को पूरा करने के लिए छोटी-मोटी चोरियां शुरू की. फिर धीरे-धीरे इस गांव के लोगों ने एक संगठन बना लिया और व्यवस्थित ढंग से लूटपाट की घटनाओं को अंजाम देने लगे. धीरे-धीरे पूरे देश में अपना जाल फैला लिया. जानकार बताते हैं कि लगभग 5000 लोगों की यह बस्ती है. यह बस्ती अब क्राइम की फैक्ट्री बन गई है. इस गैंग के लोगों में काफी एकता होती है. यह लोग मिलजुल कर ही अपराध को अंजाम देते है. उनके गैंग में रेकी से लेकर अपराधी को ट्रैक करने लूटने और छीना -झपटी के लिए अलग-अलग लोग तय होते हैं. एक आदमी रेकी करता है तो दूसरा अपने शिकार पर नजर बनाए रहता है. इसी तरह कोई और बाइक पर सवार होकर शिकार से लूट करता है.
ट्रेन से लेकर सड़क तक ,यह गिरोह करता है काम
लोग तो यह भी बताते हैं कि जो कार उनके निशाने पर आ गई, समझिए पल भर में गायब हो जाएगी. कार के बड़े से बड़े लॉक को आसानी से खोलकर चुराने में सिद्धहस्त होते है. चर्चा तो यह भी है कि एक बार पुलिस ने गांव में रेड की थी ,तो सैकड़ो कार बरामद की गई थी. देशभर से इन कारों को चुराकर इस गांव में रखा गया था. यह गिरोह ट्रेन में चोरी का काम भी करता है. ट्रेन में चोरी करने के भी इनके कई तरीके हैं. पहले ट्रेन की रेकी करते हैं, यात्रियों को परखते हैं, फिर दूसरे साथियों को बताते हैं कि किसके पास कितनी कीमत के समान हैं. सबसे खास बात है कि लूटपाट के तरीके उनके गांव में ही सिखाए जाते हैं. बाकायदा उनकी ट्रेनिंग होती हैं. हर अंतराल पर एक पंचायत लगती है, जिसमें गैंग के सभी अपराधी शामिल होते हैं. पंचायत का मुखिया कुछ नियम कायदे तय करता है, जिसे हर किसी को मानना होता हैं.
