जमुई: बीते दिनों जमुई के मड़वा पहाड़ पर नाबालिग छात्रा से छेड़खानी के आरोपी का केस लड़ने के लिए जिले के कोई वकील तैयार नहीं हैं. जमुई के सभी अधिवक्ताओं ने एकजुट हो कर छेड़खानी के आरोपियों का केस नहीं लड़ने का फैसला लिया और अब तक इस पर अडिग भी हैं. पुलिस ने तत्परता से इस मामले में चार्जशीट भी दाखिल कर दिया है लेकिन आरोपी नंदन यादव और प्रमोद के लिए अब तक किसी अधिवक्ता ने वकालतनामा दाखिल नहीं किया है. आरोपियों की तरफ से वकालतनामा दाखिल नहीं किए जाने की वजह से केस की सुनवाई शुरू नहीं हो पाई है जबकि जिला प्रशासन ने भी मामले की स्पीडी ट्रायल के कोर्ट को पत्र लिखा है.
छठ पर्व के बाद शुरू होगी कार्रवाई
आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल होने के बावजूद सुनवाई शुरू नहीं होने के बाद पॉक्सो अदालत के विशेष न्यायाधीश महेश्वर दुबे ने जिला विधिक सेवा प्राधिकार को अधिवक्ता नियुक्त करने का आदेश दिया है. जिला विधिक सेवा प्राधिकार के द्वारा आरोपियों के लिए अधिवक्ता नियुक्त किए जाने के उपरांत छठ के बाद कोर्ट खुलते ही सुनवाई शुरू होगी.
जिला विधिक सेवा प्राधिकार क्यों नियुक्त करेगा अधिवक्ता
देश के संविधान के अनुसार किसी भी मामले के आरोपी को कोर्ट में अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार है. कोर्ट आरोपी को भी बचाव में अपनी बात अदालत के समक्ष रखने का मौका देता है. नियम है कि अगर कोई आरोपी किसी कारणवश अपना पक्ष रखने के लिए वकील नियुक्त नहीं कर पाता है तो ऐसे में उसे विधिक सेवा प्राधिकार के माध्यम से वकील उपलब्ध कराया जाता है. यही वजह है कि पॉक्सो न्यायालय के विशेष न्यायाधीश ने जिला विधिक सेवा प्राधिकार को आदेश दिया है कि नाबालिग से छेडखानी के आरोपी के लिए अधिवक्ता नियुक्त किया जाए.
क्या है मामला?
बता दें कि मामला बीते 19 सितंबर का है जब घूमने गए एक छात्र और छात्रा के साथ जमुई के मड़वा पहाड़ पर कुछ युवकों ने छेड़खानी तथा मारपीट की थी. सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के मामला सामने आया और पुलिस ने कार्रवाई शुरू की. पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की पहचान की तथा उनकी तलाश शुरू कर दी. छानबीन के क्रम में पुलिस ने एक आरोपी नंदन यादव को मुठभेड़ में पैर में गोली मार कर गिरफ्तार किया वहीं एक अन्य आरोपी प्रमोद को भी गिरफ्तार किया गया. दोनों की गिरफ्तारी के बाद जिले अधिवक्ताओं ने सामूहिक रूप से फैसला लिया था कि कोई आरोपियों के बचाव में केस नहीं लड़ेंगे. अब पॉक्सो अदालत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकार को अधिवक्ता नियुक्त करने का आदेश दिया है.