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भैंस किसकी? अब DNA टेस्ट खोलेगा मालिक का राज, गया में गजब का विवाद,पढ़िए रोचक खबर

Rajnish Sinha
Rajnish Sinha
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गया (BIHAR) : बिहार के गया जिले में जमीन, मकान या वाहन नहीं, बल्कि एक भैंस के मालिकाना हक को लेकर ऐसा विवाद सामने आया है जिसका समाधान अब वैज्ञानिक जांच से निकालने की तैयारी है. अतरी थाना क्षेत्र में दो पक्ष एक ही भैंस को अपना बता रहे हैं. मामला पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचने के बाद अब DNA टेस्ट के जरिए दावे की सच्चाई जांचने की बात सामने आई है.

एक भैंस पर दो परिवारों का दावा 

मोहड़ा प्रखंड के सेउतर गांव निवासी सूरज यादव का कहना है कि उनकी भैंस कुछ समय पहले गायब हो गई थी. परिवार ने आसपास के इलाकों में काफी खोजबीन की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला. बाद में जानकारी मिली कि एक भैंस उपथू के महाचक गांव के नौरंगा टोली में मौजूद है.सूरज यादव वहां पहुंचे और भैंस को अपनी बताते हुए उस पर दावा किया. बताया गया कि भैंस उस समय प्रकाश मांझी के पास थी. यहीं से दोनों पक्षों के बीच मालिकाना हक को लेकर विवाद शुरू हो गया.

पुलिस थाने तक पहुंचा मामला 

विवाद बढ़ने पर अतरी थाना पुलिस ने भैंस को थाने मंगवाया. शुरुआती कार्रवाई के बाद उसे सूरज यादव को सौंप दिया गया. हालांकि दूसरे पक्ष ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए और थाना प्रभारी पर पक्षपात का आरोप लगाया. इसके बाद भैंस को दोबारा थाने लाया गया. कुछ समय बाद उसे फिर सूरज यादव की देखरेख में दे दिया गया.

दूसरे पक्ष ने किया चार साल पुराना दावा 

प्रकाश मांझी के पक्ष का दावा है कि उनकी भैंस करीब चार साल पहले चोरी हो गई थी. उनका कहना है कि मौजूदा विवाद वाली भैंस वही है और पुराने स्थान को पहचानते हुए वापस उनके इलाके में पहुंच गई. इस दावे के बाद मामला और पेचीदा हो गया, क्योंकि दोनों पक्ष भैंस को अपनी बताने पर अड़े हैं.

DNA जांच से सुलक्ष सकती है गुत्थी 

मामले की गंभीरता को देखते हुए मगध प्रक्षेत्र के आईजी विकास वैभव ने ग्रामीण एसपी दिव्यांजलि जायसवाल को निष्पक्ष और तेजी से जांच करने का निर्देश दिया है. साथ ही भैंस के वास्तविक संबंध और पहचान स्थापित करने के लिए DNA जांच कराने की दिशा में कार्रवाई करने को कहा गया है. DNA जांच तभी निर्णायक साबित हो सकती है, जब विवादित भैंस के नमूने की तुलना उससे जैविक रूप से संबंधित पशुओं के प्रमाणित नमूनों से की जाए. ऐसे में वैज्ञानिक जांच और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह तय करने की कोशिश होगी कि दोनों पक्षों में किसका दावा अधिक मजबूत है.

फिलहाल गया का यह अनोखा मामला चर्चा में है. अब निगाहें जांच के नतीजों पर हैं, जो भैंस के मालिकाना हक के इस विवाद को नई दिशा दे सकता है.

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