Bihar

नारी तुझे सलाम! गांव पर आई आफत तो टोकरी-कुदाल लेकर नदी में उतरी महिलाएं, बांधने लगीं बांध

Priyanka Kumari CE
Priyanka Kumari CE
Sr. Content Writer

पश्चिम चंपारण(PASCHIM CHAMPARAN):कहा जाता है कि जब भी देश, परिवार या समाज पर कोई संकट आता है, तो महिलाएं अपनी जिम्मेदारी को समझती हैं और नारी शक्ति का परिचय देती हैं, क्योंकि नारी शक्ति से कोई भी मुकाबला नहीं कर सकता. एक नारी चाह ले तो कुछ भी कर सकती है और करके दिखाती भी है. दरअसल, हम नारी शक्ति की बात आज इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि बिहार के पश्चिम चंपारण से एक ऐसी ही खबर सामने आई है, जिसने यह साबित किया है कि नारी कुछ भी कर सकती है.

 टोकरी-कुदाल लेकर नदी में उतर गईं महिलाएं

दरअसल, पश्चिम चंपारण के रामनगर रामनगर की दो पंचायतों के 22 गांवों में जनजाति बहुल लोग निवास करते हैं. ये 22 गांव विकास से कोसों दूर हैं. हाल यह है कि बरसात में लोगों को एक गांव से दूसरे गांव जाने के लिए जान हथेली पर रखकर पहाड़ी नदियों के उफान भरे पानी को पार करना पड़ता है. गांव में दो लोगों की नदी पार करने के दौरान मौत हो चुकी है और नदी अपनी धारा को गांव के समीप कटाव करके पहुंचा रही है.जब नदी में पानी कम हुआ, तो नरकटिया दोन और भुअरहवा दोन गांव के सैकड़ों महिला-पुरुष नदी में उतरे और गांव को नदी के पानी के कटाव से सुरक्षित करने के लिए बालू-मिट्टी सिर पर उठाकर बांध बांधने लगे. सबसे बड़ी बात यह है कि गांव को बचाने की बात सामने आई तो टोकरी, कुदाल लेकर नदी में श्रमदान करते नजर आईं ये नारी शक्ति.

गांव के पुरुष, महिला और बच्चे कर रहे है जद्दोजहद 

दरअसल, बाढ़ का पानी अभी कम हुआ है, तो अगली बारिश के पानी से नदी गांव में न घुस जाए, इससे पहले ही ग्रामीण गांव को बचाने के लिए नदी में उतरकर बांध बांधने लगे हैं. यह नरकटिया दोन गांव के समीप हरहा नदी है.वहीं, कुछ दिन पहले ही बैरिया दोन गांव के समीप खुदी नदी का बांध टूट गया था, जिससे गांव में पानी घुसने लगा था. उस समय भी ग्रामीणों ने श्रमदान करके गांव को बचाने के लिए बांध बांधकर खुदी नदी से गांव को बचाया था. अब आज हरहा नदी के तेज कटाव से नरकटिया दोन को बचाने के लिए गांव के पुरुष, महिला और बच्चे जद्दोजहद कर रहे हैं.

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