Bihar

Jharkhand - Bihar Politics: झारखंड में बड़ा कंफ्यूजन तो बिहार में उपेंद्र कुशवाहा के बेटे कैसे संकट में, तेजश्वी की क्या परेशानी

Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist

धनबाद (DHANBAD): झारखंड और बिहार का राजनीतिक पारा चढ़ा हुआ है. झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर गहमागहमी है, तो बिहार में विधान परिषद चुनाव को लेकर राजनीतिक तापमान चढ़ा हुआ है. झारखंड के राज्यसभा चुनाव में तो गजब का कंफ्यूजन है. वैसे 8 जून को उम्मीदवारों के नॉमिनेशन के साथ सब कुछ साफ हो जाएगा कि झारखंड में किस उम्मीदवार के साथ कौन सा दल शामिल है. दरअसल, उम्मीदवार को 10 प्रस्तावकों के हस्ताक्षर देने होते है. यह सब नामांकन के समय करना पड़ता है. प्रस्तावक के हस्ताक्षर के बाद सब कुछ क्लियर हो जाएगा कि कौन किस दल को समर्थन करने वाला है या किसके भरोसे निर्दलीय उम्मीदवार राज्यसभा चुनाव लड़ने की योजना तैयार किये है. 

झारखण्ड में सबसे अधिक परेशान कांग्रेस है

दरअसल, झारखंड में सबसे परेशान कांग्रेस है. झामुमो ने एक सीट पर उम्मीदवार की घोषणा करने के बाद फिलहाल चुप है. कांग्रेस ने प्रणव झा को उम्मीदवार घोषित किया है. कांग्रेस के लोग मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से मैसेज का इंतजार कर रहे हैं, तो दूसरी ओर राज्यसभा चुनाव के लिए पार्टी की ओर से नियुक्त किए गए नेता इस मामले का हल निकालने को लेकर लगातार बैठक कर रहे है. कहा जा सकता है कि झारखंड के राज्यसभा चुनाव का मामला किस करवट जाकर बैठेगा, यह कहना अभी कठिन है.  

उपेंद्र कुशवाहा के मंत्री बेटे दीपक प्रकाश की कुर्सी पर खतरा

दूसरी ओर बिहार में विधान परिषद चुनाव को लेकर सरगर्मी है. उपेंद्र कुशवाहा के मंत्री बेटे दीपक प्रकाश की कुर्सी पर खतरा उत्पन्न हो गया है. एनडीए ने अपने नौ उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर दी है. इसमें दीपक प्रकाश को जगह नहीं मिली है. सूत्र बताते हैं कि निकट भविष्य में विधान परिषद का कोई चुनाव भी नहीं होने वाला है. राज्यपाल के मनोनीत वाली सीटों पर अगले साल चुनाव होगा, जबकि नितिन नवीन की  रिक्त हुई बांकीपुर विधानसभा भाजपा की पारंपरिक सीट है. यहां से भी दीपक प्रकाश को टिकट मिलने की कोई गुंजाइश नहीं दिखती है. बिहार विधान परिषद में 10 सीटों का चुनाव हो रहा है. इसमें 9 सीट पर द्वि  वार्षिक चुनाव है, जबकि एक नीतीश कुमार के सीट छोड़ने के कारण उप चुनाव  होगा.

बिहार में नौ सीटों पर एनडीए जित सकता है चुनाव

मौजूदा गणित के अनुसार एनडीए 9 सीटों पर चुनाव जीत सकता है, जबकि एक सीट महा गठबंधन के खाते में जा सकती है. दरअसल, कोई व्यक्ति बगैर किसी सदन के सदस्य रहे मंत्री तो बन सकता है लेकिन उसे 6 महीने के अंदर किसी न किसी सदन का सदस्य बनना होता है. दीपक प्रकाश पहली बार नीतीश सरकार में मंत्री बने लेकिन वह सरकार भंग हो गई.  फिर सम्राट चौधरी सरकार में दीपक प्रकाश मंत्री बने हैं. एनडीए ने अपने आठ उम्मीदवारों की घोषणा की है तो चिराग पासवान ने एक सीट पर अपने उम्मीदवार उतार दिए है. इधर, उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी भी कम चर्चा में  में नहीं है. बेटे को टिकट की चर्चा के बीच उपेंद्र कुशवाहा ने रविवार को पटना में एक बड़ा राजनीतिक दांव चल दिया है. 

उपेंद्र कुशवाहा ने चल दिया है बड़ा दांव,अब आगे क्या 

उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी बिहार में सत्ता की मजबूत हिस्सेदार है और आगे भी उसकी हिस्सेदारी मजबूती के साथ रहेगी. उपेंद्र कुशवाहा रविवार को पटना के रविंद्र भवन में आयोजित पार्टी के राज्य महाधिवेशन को संबोधित करते हुए यह बात कही. उन्होंने नए बिहार प्रदेश अध्यक्ष के रूप में विधायक आलोक कुमार सिंह के नाम का औपचारिक ऐलान किया. साथ ही कहा कि स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार को डिप्टी सीएम की कुर्सी मिलनी चाहिए, मतलब पूरी की पूरी राजनीति इशारों-इशारों में चल रही है. इधर, महागठबंधन ने भी उम्मीदवार की अब तक घोषणा नहीं की है. तेजस्वी यादव के लिए उम्मीदवार के नाम की घोषणा करना बहुत आसान भी नहीं होगा. राजद  के पास कुल 25 विधायक हैं जबकि जीत के लिए 28 विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी. ऐसे में तेजस्वी यादव को भी ओवैसी की पार्टी और कांग्रेस के समर्थन की जरूरत पड़ेगी. राजद  में भी उम्मीदवारों की संख्या कम नहीं है. एनडीए और चिराग पासवान की घोषणा के बाद अब सबकी नजर तेजस्वी यादव और उपेंद्र कुशवाहा पर आकर टिक गई है. देखना दिलचस्प होगा कि आगे आगे होता है क्या?